June 2021

तिल-तिल कर हम जलना सीखें

हिंदी कविता

तिल-तिल कर हम जलना सीखें जीवन दीप वर्तिका तन की, स्नेह हृदय में भरना सीखें।दानवता का तिमिर हटाने, तिल-तिल कर हम जलना सीखें। अमा निशासी घोर निशा हो, अन्धकारमय दसों दिशा हों।झंझा के झोंके हों प्रतिपल, फिर भी अविचल चलना सीखें ॥ तिल.. बीहड़ वन चाहे नद – नाले, शैल शृंगारभी बाधा डालें।कुश-कंटक-युत पंथ विकट […]

तिल-तिल कर हम जलना सीखें Read More »

मानवता के खातिर अब वृक्ष लगाऐंगे

हिंदी कविता

मानवता के खातिर अब वृक्ष लगाऐंगे।   कटेंगे वृक्ष , जंगल में तो, कैसे होगा विश्व में मंगल, बढ़ती जनसंख्या से हो रहा, जब संसार में मानव – दंगल। पर्यावरण समस्या को सुलझाऐंगे, मानवता के खातिर अब वृक्ष लगाऐंगे। मधुमक्खियों का शहद और चिड़ियों की आवाज, कंद – मूल फल में छिपाहै स्वस्थ सेहत का राज।

मानवता के खातिर अब वृक्ष लगाऐंगे Read More »

थाम लो सँभालकर देश की मशाल को

हिंदी कविता

थाम लो सँभालकर देश की मशाल को हिन्द के बहादुरो शूरवीर बालको!थाम लो सँभाल कर देश की मशाल को! अन्धकार का गरूर आन-बान तोड़ दो,बालको, भविष्य के लिए मिसाल छोड़ दो,दो नयी-नयी दिशा वर्तमान काल को।थाम लो सँभाल कर देश की मशाल को! देश माँगता कि खून से रंगा गुलाब दो,तुम उठो सिपाहियो ! शत्रु

थाम लो सँभालकर देश की मशाल को Read More »

नदी का रास्ता

हिंदी कविता

नदी का रास्ता नदी को रास्ता किसने दिखाया?सिखाया था उसे किसनेकि अपनी भावना के वेग कोउन्मुक्त बहने दे?कि वह अपने लिएखुद खोज लेगीसिन्धु की गंभीरतास्वच्छंद बहकरइसे हम पूछते आए युगों से,और सुनते भी युगों से आ रहे उत्तर नदी कामुझे कोई कभी आया नहीं था राह दिखलाने;बनाया मार्ग मैंने आप ही अपना। ढकेला था शिलाओं

नदी का रास्ता Read More »

Scroll to Top