तिल-तिल कर हम जलना सीखें
हिंदी कवितातिल-तिल कर हम जलना सीखें जीवन दीप वर्तिका तन की, स्नेह हृदय में भरना सीखें।दानवता का तिमिर हटाने, तिल-तिल कर हम जलना सीखें। अमा निशासी घोर निशा हो, अन्धकारमय दसों दिशा हों।झंझा के झोंके हों प्रतिपल, फिर भी अविचल चलना सीखें ॥ तिल.. बीहड़ वन चाहे नद – नाले, शैल शृंगारभी बाधा डालें।कुश-कंटक-युत पंथ विकट […]
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