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यादों के झरोखे से
प्रभात हो गया
दोहा पंचक
ये है मेरा वतन
हे मां शारदे रोशनी दे ज्ञान की
बापू जी तुम्हें नही भूले
देखो न मुझे बुखार है
वतन का नमक
ओ मोरे घनश्याम साँवरे
सूनापन पर गीत
मोहब्बत पर गीत
हम कहाँ गुम हो गये
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