कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

20 सितंबर: 1857 का दिल्ली संग्राम (विशेष कविता)

1857 का दिल्ली संग्राम और 20 सितंबर का इतिहास: एक अमर क्रांति गाथा

देशभक्ति, हिंदी कविता

भारत का इतिहास शौर्य, त्याग और बलिदान की अनगिनत गाथाओं से भरा पड़ा है। जब भी 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (First War of Indian Independence) की बात होती है, तो हमारे मन में देशभक्ति की एक लहर दौड़ जाती है। 20 सितंबर का दिन भारतीय इतिहास में एक ऐसा ही महत्वपूर्ण और भावुक दिन

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तुम आलसी नहीं हो, तुम प्रेमहीन हो

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

तुम आलसी नहीं हो, तुम प्रेमहीन हो आलस्यऊर्जा की कमी नहीं है।यहसमझ की कमी है। तुम अपने भीतर कीभूमि को नहीं जानते—इसलिएयह भी नहीं जानतेकि कौन-सा कर्मतुम्हें जीवित करेगा,कौन-सा प्रयाससचमुच फल देगा। कर्मऊर्जा माँगता है।और जबउस ऊर्जा कालाभ स्पष्ट न हो,तोमनक्रिया के बजायनिष्क्रियता चुन लेता है। यहीआलस्य कहलाता है। यदि तुमनेकभीसही कर्म कीमिठास चखी होती—उस

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एक दिन में अनंत समय है

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

एक दिन में अनंत समय है जो जानता हैकि घड़ी चल रही है,वहक्षण कोखाली लौटने नहीं देता। जीवन का सम्मानसमय के सम्मान सेशुरू होता है। तुम कहते हो—एक दिन मेंसिर्फ़ चौबीस घंटे होते हैं। पर यहसिर्फ़तुम्हारी परिभाषा है। ज़रा रुको।गिनती बदलो। एक दिन मेंकितने मिनट होते हैं?देखो—समयअचानकफैलने लगा। अबसेकंड गिनो।समयऔर फैल गया। और एक सेकंड?उसमेंअरबों

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समय नहीं उड़ता, तुम बह जाते हो

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय नहीं उड़ता, तुम बह जाते हो समयकहीं भागता नहीं।वहतुम्हारे पीछे-पीछेचलता है। जैसा तुम मूल्य देते हो,वैसा हीसमय बँटता है। हर क्षणतुम स्वयं तय करते हो—ध्यान कहाँ जाएगा,ऊर्जा किसे मिलेगी,जीवन किस दिशा मेंढलेगा। भटकाव,कर्तव्य,इच्छाएँ—सबतुम्हारी प्राथमिकताओं केअनुवाद हैं। समयकोई रहस्य नहीं।वहएक दर्पण है—जो दिखाता हैकि तुम्हारे भीतरवास्तव मेंमहत्त्वपूर्ण क्या है। इसलिए जब तुम कहते हो—“पता ही

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खोल से बाहर

मन और भावनाएँ

खोल से बाहर आकाश से प्रेमकोई भावना नहीं है।वह एक असहजता है—उस हर सीमा के प्रतिजिसे तुमने कभीघर मान लिया था। हर जीवनकिसी न किसी खोल मेंशुरू होता है।खोल सुरक्षा देता है,ऊष्मा देता है,पहचान देता है।शुरुआत मेंवह आवश्यक होता है। पर जो आवश्यक था,वहीस्थायी नहीं हो सकता। एक बिंदु आता हैजब वही खोलजिसने बचाया था,दम

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यह तुम्हारी नियति नहीं है!

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

यह तुम्हारी नियति नहीं है! तुमकुछ बनने नहीं आए हो।तुमकुछ याद करने आए हो। जिसे तुमखोज रहे हो—वहकभी खोया ही नहीं। खोजने वालाझूठा है।जिसे खोजना है,वहपहले सेमौजूद है। अपनीमूल सत्ता कोमत भूलो—वहतुम्हारेआज के अनुभवों सेकहीं आगे है। तुमअसीम हो।अपरिमेय। भले हीतुम्हारेखाने,सोचने,जीने के ढंग मेंइसकाकोई प्रमाण न दिखे। आदतेंइसे नहीं दिखातीं।चुनावइसे व्यक्त नहीं करते। फिर भीयह

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प्रोग्राम की गई भावनाएँ

समाज और यथार्थ

प्रोग्राम की गई भावनाएँ भावनाएँजन्मजात नहीं होतीं—वेसंस्कारों की भाषा हैं। सोचजैसेमानसिक ढर्रों सेउगती है,वैसे हीभावशरीर और समाज कीजमी हुईलकीरों सेफूटते हैं। भाव उठेउससे पहले हीरसायनअपना कामशुरू कर चुके होते हैं। हार्मोनघंटी बजा देते हैं—और मननाम दे देता है। भावनासोच सेगहरी लगती हैक्योंकिउसमेंदेह का वजन है। इसीलिएवहअपरिहार्य,पवित्र,“दिल से निकली”महसूस होती है। परयह भ्रम है। क्रोध,भय,कामना,आसक्ति—येजंगल की

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दर्द में खेलो

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द में खेलो दर्द में खेलो।दर्द के साथ खेलो।बसखेलते रहो। दर्द है—हाँ।पर जबकिसी सार्थक चीज़ मेंपूरी तरह डूबे हो,तो क्यादर्द परध्यान बचता है? वहकिनारे चला जाता है।केंद्र नहीं बनता।उद्देश्य कोहाइजैक नहीं करता। एक साधारण खिलाड़ी भीयह जानता है—जीत की दौड़ मेंदर्ददूसरे नंबर पर होता है। जब तकस्ट्रेचर न आए,खेलरुकता नहीं। दोपहर का सूरजआग उगल रहा

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झूठ के लिए चमकने से बेहतर है सत्य के लिए लहूलुहान होना

समाज और यथार्थ

झूठ के लिए चमकने से बेहतर है सत्य के लिए लहूलुहान होना हारअसफलता नहीं होती।सबसे बड़ी हार है—यह जानकर भीकि युद्ध योग्य है,पीठ फेर लेना। उत्कृष्ट बनने से पहलेपूछो—किसमें? तेज़ चलने से पहलेपूछो—किस दिशा में? गति बाद में आती है।दिशा पहले। गलत राह पर उड़ने से बेहतर हैसही रास्ते पररेंगना। सही चुनाव करनासही चुनाव मेंपरफेक्ट

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तुम अपने दुख की सहमति देते हो

विरह और दर्द

तुम अपने दुख की सहमति देते हो चुनाव!तुम असहाय नहीं हो।बहाए नहीं जा रहे—तुम चल रहे हो। कुछ भीतुम पर घटित नहीं होताबिना तुम्हारीमौन अनुमति के। दुख आता हैऔर तुमकिसी को ढूँढते हो—दोष देने के लिए।व्यक्ति, परिस्थिति,भाग्य, समय। पर स्वतंत्रताबिना जिम्मेदारीकभी मिली है? जो दुख भोग रहा है,सबसे बड़ा हितउसी का है—उसे समाप्त करने में।

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क़िस्तों में दिया गया दर्द

विरह और दर्द, हिंदी कविता

क़िस्तों में दिया गया दर्द हम सीधेछाती पर चोट नहीं लेते।हम तैयार नहीं होतेएक सच्चे,पूरा चीर देने वालेवार के लिए। इसलिए मनचाल चलता है—एक ही सच कोसौ टुकड़ों मेंतोड़ देता है। घाव रहता है,पर फैल जाता है।टल जाता है।छुप जाता है। अगर पीड़ाएक साथ आती—तीव्र,अस्वीकार्य—तो शायदहमें रुकना पड़ता।देखना पड़ता।सच मानना पड़ता। पर हमनेज़िंदगी ऐसे रची

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दर्द से नमस्ते कहो

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द से नमस्ते कहो दर्द आएगा—यह टाला नहीं जा सकता।पर भ्रम?वे वैकल्पिक हैं। कुछ दर्दसंयोग से आते हैं—बिना अनुमति।उन्हेंउतनी ही जगह दोजितनी ज़रूरी हो। कुछ दर्दतुम चुनते हो—सही बदलाव की कीमत।उसेखुले दिल सेस्वीकार करो। और कुछ दर्दमूर्खता से पैदा होते हैं—गलत निर्णय,बिना देखे उठाए कदम।यह दर्द क्यों ढोना? जीवनलगातार बहता है।देह और मनठहराव चाहते हैं।यहीं

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