तू जो मिली होने लगी ,जीने की ख्वाहिश । आई मेरे जीवन में तू , रब की नुमाइश। नवाजिश नवाजिश बस रब की नवाजिश।
मुझको अपनी पनाह में ले ले । सुन ले मेरी इल्तजा। कुछ ना भाये तेरे सिवा
कैसा वक्त का तकाजा । तुझसे मिला, पूरी हूई मेरी फरमाइश। आई मेरे जीवन में तू , रब की नुमाइश।
नवाजिश नवाजिश बस रब की नवाजिश।।
मनीभाई नवरत्न
📝 कवि परिचय
यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।