मन पर कविता

मन पर कविता

मन सरिता बहाती कलकल
स्वछन्द वेग से तेरी स्मृतियों का जल।
मन सरिता की गहराई अथाह
तेरी स्मृतियों का ही रखरखाव।
मन सरिता की लहरें अशांत
कभी न चाहे तेरी स्मृतियों का अंत।
मन सरिता का जहाँ भी मोड़
तेरी स्मृति का ही एक छोर।
मन सरिता की अतृप्त प्यास
तेरी स्मृति जल की ही आस।
मन सरिता का जीवित मतस्य
खान-पान का तेरी स्मृतियां रहस्य।

राजीव कुमार
बोकारो स्टील सिटी
झारखण्ड
8797905224

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