गरीबी पर कविता (17 अक्टूबर गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर कविता )By कविता बहार / दिन विशेष कविता गरीबी पर कविता गरीबी तू इतना रूलाया न कर हमेंजो मर गये तो, कहाँ पे तेरा आसरा है?मज़ाक उड़ाया सबके सामने कुछ यूँवाह भाई! अमीरों सा तेरा भी नखरा है??मनीभाई नवरत्न छत्तीसगढ़ 📢 इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें: 📲 WhatsApp ✈ Telegram 📘 Facebook Related Posts गरीबी का घाव हाय रे गरीबी गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी 0 thoughts on “गरीबी पर कविता (17 अक्टूबर गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर कविता )”डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर April 10, 2020 at 9:53 pmवाह वाह क्या बात सर जीLeave a CommentYour email address will not be published. Required fields are marked *Type here.. Name* Email* Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.
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