सवेरा पर कविता
हिंदी कवितासवेरा पर कविता हुआ सवेरा जानकर , गुंजन करे विहंग।चले नहाने सर्वजन,कलकल करती गंग।। नित्य सवेरे जो उठे , होता वह नीरोग।सुख से वह रहता सदा,करता है सुखभोग।। नित्य सवेरे जो जपे, मन से प्रभु का नाम।मिट जाते है कष्ट सब ,पाता वह आराम।। त्याग करें आलस्य का , जगें सवेरे नित्य।शुचि हो प्रभु का
