सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता

सुलोचना परमार उत्तरांचली की कविता तो मैं क्या करूँ ? आज आसमाँ भी रोया मेरे हाल परऔर अश्कों से दामन भिगोता रहा,वो तो पहलू से दिल मेरा लेकर गयेऔर मुड़कर न देखा तो मैं क्या करूँ ? उनकी यादें छमाछम बरसती रहींमन के आंगन को मेरे भिगोती रहींखून बनकर गिरे अश्क रुख़सार पर,कोई पोंछे न … Read more

स्वच्छता पर कुंडलिया

स्वच्छता पर कुंडलिया घर घर में अब देश के, मने स्वच्छता पर्व।दूर करें सब गंदगी, खुद पर तब हो गर्व।खुद पर तब हो गर्व, न कोई कोना छोड़ें।बदलें आदत सर्व, समय का अब रुख मोड़ें।नद नालें हो साफ, बहे जल उनमें निर्झर।नया स्वच्छता भाव, पले भारत के हर घर।।1 साफ-सफाई के लिये, चलें नये अभियान।सर्व … Read more

प्लास्टिक मिटा देंगे हम

प्लास्टिक मिटा देंगे हम दुनिया से प्लास्टिक मिटा देंगे हम. हम तुम सनम चलो खाले कसम |दुनिया से प्लास्टिक मिटा देंगे हम | ये गलता नही मिट्टी मे मिलता नही |खाती गाये पेट उनके पचता नहीं | मरती गायों को मिल बचाएंगे हम |हम तुम सनम चलो खाले कसम | इसके बर्तन बोतल इस्तेमाल न करो … Read more

मदारी-दिलीप कुमार पाठक “सरस”

“मदारी” बँदरिया प्यारी,        एक मदारी,           लेकर आया|तन लटा,      कपड़े फटे,          पेट धँसा,             फिर भी,            जबर्दस्ती मुस्कराया||जेठ का महीना,         भरी दोपहरी,              चूता पसीना, डमरू बजाकर,         बँदरिया नचाकर,   … Read more

गरीबी का दर्द-महेश गुप्ता जौनपुरी

गरीबी का दर्द क्या दर्द देखेगी दुनिया तेरीसुख गया है आंखों के पानीरिमझिम बारिश की फुहार मेंसमेट रखा है आंचल मेंगरीब तेरी कहानी कोउपहास बनायेगी ये दुनियातू कल भी फुटपाथ पर थाआज भी तेरी यही कहानी हैगरीब था तू गरीब रहेगावंचित तू अपने तकदीर से रहेगासुन गरीब लगा लें जोरअपना अस्तित्व बचा ले अबअब ना … Read more