कविता बहार

रोला छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

रोला छंद [सम मात्रिक] विधान – 24 मात्रा, 11,13 पर यति, यति से पहले वाचिक भार 21 या गाल (अपवाद स्वरुप 122 या लगागा भी) और यति के बाद वाचिक भार 12 लगा या 21 गाल l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरणों में तुकांत l प्रत्येक चरण यति पर दो पदों में विभाजित हो […]

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साल आता रहा दिन गुजरता रहा

हिंदी कविता

साल आता रहा दिन गुजरता रहा साल आता रहा दिन गुजरता रहाचाँद लाचार होकर पिघलता रहा।।उनको रोटी मिली ना रही आबरुवो तो रुपये की सूरत बदलता रहा।। दूर मुझसे रहे खाई गहरी रहीवक़्त मुझसे मुझी में सिमटता रहा।।पांच वर्षों में इक बार कम्बल बंटेठंढ से उनका कस्बा क्यूँ डरता रहा।। उनकी नज़रों का है कुछ

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निश्चल छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

निश्चल छंद [सम मात्रिक] विधान – 23 मात्रा, 16,7 पर यति, चरणान्त में 21 या गाल l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l उदाहरण :बीमारी में चाहे जितना, सह लो क्लेश,पर रिश्ते-नाते में देना, मत सन्देश lआकर बतियायें, इठलायें, निस्संकोच,चैन लूट रोगी का, खायें, बोटी नोच l – ओम नीरव

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रास छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

रास छंद [सम मात्रिक] विधान – 22 मात्रा, 8,8,6 पर यति, अंत में 112 , चार चरण , क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l उदाहरण :व्यस्त रहे जो, मस्त रहे वह, सत्य यही,कुछ न करे जो, त्रस्त रहे वह, बात सही lजो न समय का, मूल्य समझता, मूर्ख बड़ा,सब जाते उस, पार मूर्ख इस, पार खड़ा

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शंकर छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

शंकर छंद [सम मात्रिक] विधान – 26 मात्रा, 16,10 पर यति, चरणान्त में 21 या गाल l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरणों पर तुकांत l उदाहरण :सुरभित फूलों से सम्मोहित, बावरे मत भूल, इन फूलों के बीच छिपे हैं, घाव करते शूल। स्निग्ध छुअन या क्रूर चुभन हो, सभी से रख प्रीत, आँसू पीकर

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सरसी/कबीर/सुमंदर छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

सरसी/कबीर/सुमंदर छंद [सम मात्रिक] विधान – 27 मात्रा, 16,11 पर यति, चरणान्त में 21 लगा अनिवार्य l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l विशेष : चौपाई का कोई एक चरण और दोहा का सम चरण मिलाने से सरसी का एक चरण बन जाता है l उदाहरण :पहले लय से गान हुआ फिर, बना

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गर्मी की छुट्टियां पर बाल कविता

हिंदी कविता

गर्मी की छुट्टियां पर बाल कविता : गर्मी की छुट्टी या गर्मी की छुट्टी स्कूल के वर्षों और स्कूल शैक्षणिक वर्ष के बीच गर्मियों में एक स्कूल की छुट्टी है। छात्र आमतौर पर आठ से नौ सप्ताह के बीच बंद रहते हैं। देश और जिले के आधार पर, कर्मचारियों को आंशिक रूप से या पूरी

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तरबूज पर बाल कवितायेँ

हिंदी कविता

तरबूज पर बाल कविता : तरबूज़ ग्रीष्म ऋतु का फल है। यह बाहर से हरे रंग के होते हैं, परन्तु अंदर से लाल और पानी से भरपूर व मीठे होते हैं। इनकी फ़सल आमतौर पर गर्मी में तैयार होती है। पारमरिक रूप से इन्हें गर्मी में खाना अच्छा माना जाता है क्योंकि यह शरीर में

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लावणी/कुकुभ/ताटंक छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

लावणी/कुकुभ/ताटंक छंद [सम मात्रिक] विधान – 30 मात्रा, 16,14 पर यति l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l विशेष – इसके चरणान्त में वर्णिक भार 222 या गागागा अनिवार्य होने पर ताटंक , 22 या गागा होने पर कुकुभ और कोई ऐसा प्रतिबन्ध न होने पर यह लावणी छंद कहलाता है l उदाहरण

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बीर/आल्ह छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

बीर/आल्ह छंद [सम मात्रिक] विधान – 31 मात्रा, 16,15 पर यति, चरणान्त में वाचिक भार 21 या गाल l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरणों पर तुकांत l उदाहरण :विनयशीलता बहुत दिखाते, लेकिन मन में भरा घमण्ड,तनिक चोट जो लगे अहम् को, पल में हो जाते उद्दण्ड। गुरुवर कहकर टाँग खींचते , देखे कितने ही

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केले पर कविता

हिंदी कविता

केले पर कविता सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा नाम है बनाना। यूं तो हू मैं पीले रंग का सबका दिल हूं चुराता । आम, अनार, सेब, संतरेसबके स्वाद निराले। मैं जीता हूं बिना बीज के ऐसा हूं मैं अनोखा । कदली, केला, रंभा, भानूफलऊंचा लंबा मेरा कद। पूजा पाठ में करे इस्तेमालभोग भी लगे मेरे

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कभी न तोड़ो कच्चे फल

हिंदी कविता

कभी न तोड़ो कच्चे फल बात पते की सुन लो मेरी,फल खाना है बहुत जरूरी।1। सुन्दर ,स्वस्थ,निरोग रहें हम,सारे सुख का भोग करें हम।2। आम,सन्तरा,काजू खाओ,बाबू,भोले,राजू आओ।3। प्रोटीन,विटामिन सब पाये,अनन्नास,अंगूर जो खाये ।4। कुछ मौसम कुछ बारहमासी,रखे,कटे मत खाओ बासी।5। जामुन,सेब,पपीता खाओ,पास डॉक्टर के मत जाओ।6। खरबूजा,तरबूज,अनार ,खा अमरूद न हो बीमार।7। बच्चों सुन लो

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