हिंदी कविता

shri Krishna

श्रीकृष्ण जय कृष्ण हरे मुरारी

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श्रीकृष्ण जय कृष्ण हरे मुरारी जय गोपी बल्लभ कुञ्ज बिहारी 1 नन्द यशोदा की छवि प्यारीगोकुल धाम की महिमा न्यारीनाम तुम्हारा कृष्ण मुरारीमाधव गिरिधारी त्रिपुरारी श्रीकृष्ण जय कृष्ण हरे मुरारीजय गोपी बल्लभ कुञ्ज बिहारी 2 कारागार का खोला तालायमुना की लहरों को नवायातृणावर्त वत्सासुर तारादैत्य बकासुर को संहारा श्रीकृष्ण जय कृष्ण हरे मुरारीजय गोपी बल्लभ […]

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Jai Sri Ram kavitabahar

अधर जपे यह आठो याम श्री राम / रमेश कवल

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राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। अधर जपे यह आठो याम श्री राम / रमेश कवल 1 दुःख में पास न आने वालेसुख

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जय गणपति जय जय गणनायक

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गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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जय शिव शम्भू कृपा करो

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जय शिव शम्भू कृपा करो जय शिव शम्भू कृपा करो हम भक्तन के क्लेश हरो जय शिव जय शिव ॐ नम: ॐ नम: जय शिव जय शिव 1 पर्वत पर हरियाली तुम से सागर में खुशहाली तुम से गंगा हैं मतवाली तुम से संतन के संताप हरो हे शिव शम्भू कृपा करो 2 कृपा सिंधु

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जय हनुमान तुम्हारा वंदन

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जय हनुमान शक्तिपुंज ! सब विघ्न विनाशक रामदूत वैभव सुखदायक संकट-मोचक मारुति-नंदन जय हनुमान तुम्हारा वंदन 1 हे कपीश बुध्दिबल स्वामी अंजनि तनय पवनसुत नामी गुणसागर सुखपर्वत धामी जय हनुमान तुम्हारा वंदन 2 हे बजरंग ज्ञान के बादल बरस जाओ उर कर दो निर्मल द्वेष – मोह के काटो जंगल जय हनुमान तुम्हारा वंदन 3

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आम जन की हालात पर कविता – विनोद सिल्ला

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खप-खप मरता आमजन खप-खप मरता आमजन, मौज उड़ाते सेठ।शीतकाल में ठिठुरता, बहे पसीना जेठ।। खून-पसीना बह रहा, कर्मठ करता कार।परजीवी का ही चला, लाखों का व्यापार।। कमा-कमा कर रह गया, मजदूरों का हाथ।पूंजी ने फिर भी किया, सेठों का ही साथ।। अंधी चक्की पीसती, कुत्ता चाटे चून।कर्मठ तेरी कार से, सेठ कमाते दून।। नहर सड़क

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शिव जी पर कविता – हरीश बिष्ट

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शिव जी पर कविता शिवशंकर के चरणों में सब, नित-नित शीश नवाते हैं |नीलकंठ भोलेबाबा की, प्रतिपल महिमा गाते हैं ||दूध-नीर अरु बेलपत्र सब, शिव के शीश चढाते हैं |महादेव,गणनाथ, स्वरमयी, सेवा भाव जगाते हैं ||भक्तों की भक्ती से खुश हो, उनको पार लगाते हैं |कामारी, सुरसूदन जग में, सबके भाग जगाते हैं ||देव-दनुज, जन,

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निर्धन पर अत्याचार – उपमेंद्र सक्सेना

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आज यहाँ निर्धन का भोजन, छीन रहा धनवान हैहड़प रहा क्यों राशन उनका, यह कैसा इंसान है। हमने देखा नंगे भूखे, राशन कार्ड बिना रहते हैंहाय व्यवस्था की कमजोरी, जिसको बेचारे सहते हैंजिसने उनका मुँह खोला है, वह खुद उनका पेट भरेगाअनुचित लाभ उठाने वालों, न्याय स्वयं भगवान करेगा जो सक्षम है आज किसलिए, करता

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मंजिल पर कविता – सृष्टि मिश्रा

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मंजिल पर कविता राही तू आगे बढ़ता चल, देखो मंजिल दूर नहीं है।मेहनत कर आगे बढ़ता चल, देखो वो तेरे पास खड़ी है।। सच्चाई के ताकत के बल पर,अपने सपनों को पूरा कर।दिखा दे अपने जज्बे को तू,मातृभुमि की रक्षा कर।।राही तू आगे बढ़ता चल, देखो मंजिल दूर नहीं है। मत सह जुल्म और अत्याचारों

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स्वाभिमान पर कविता

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स्वाभिमान पर कविता जब शब्द अधरों से परे हुए और कोरे कागज काले कर जायें तो जब अंधेरा ही अंधेरा हो और एक चिंगारी जल जाए तो जब हार गए और टूट गए बिखरे फिर भी रूके नहीं स्वाभिमान फिर भी मरा नहीं गिरे मगर झुके नहीं।। तूफानों का मंजर था सामने दुश्मन लिए खंजर

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माँ शारदे की कृपा

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माँ शारदे की कृपा अज्ञानता का नाश हो ज्ञान का दीप जले माँ शारदे की कृपा हो जाए सफलता तब गले मिले। निकाल लाता ज्ञान के मोती उच्च हो जाती ज्ञान की ज्योति माँ शारदे की कृपा जो होती अब तक अज्ञानता में पले। ज्ञान का कमल खिलता अज्ञानता के सरोबर में मेहनत से कर

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मन की अभिलाषा

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मन की अभिलाषा वेदना का हो अंत फिर आए जीवन में बसंत मन की प्रसन्नता हो अनंत दुःख का पूर्णविराम हो मन में न कोहराम हो। आस का पंक्षी सहन पाए उड़ने को पूरा गगन पाए दुविधा में न क्षण लुटाए मन का मधूर सुर तान हो मन में न कोहराम हो। संघर्ष का मार्ग

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