नयी सुबह पर कविता
हिंदी कवितानयी सुबह पर कविता जिम्मेदारीयों कोकंधो पर बिठाकरकुछ कुछ जरूरतें पूरी करताख्वाहिशो कोआलमारी में बंद करकेगम छुपाकरचेहरे पर एक खामोश हंसीलाता ..सच मे नही है कोई शिकनमेरे माथे पर..क्योंकिबे-हिसाब उम्मीदो सेभरे है जेब मेरे..और अनगिनत ख़्वाब भीदेखे थे पहले कभी..ओह !यह क्या ?दिन निकल गया ये सब सोचते सोचतेअंधेरे ने फैला दियाअपना साम्राज्य फिर सेसच में रात […]





