धरती माता रो रो कर करती यही पुकार
हिंदी कविताधरती माता रो रो कर करती यही पुकार धरती माता रो रो कर करती यही पुकार ।न मेरा रूप बिगाड़ो रे मनुज तुम मुझे संवारो ।।महल बना कर बड़े बड़ेतुम बोझ न मुझ पर डालो ।पेड़ पौधों को काट काटकर न पर्यावरण बिगाड़ो।मैं हूँ सबकी भाग्य विधातासब जीवों से मुझे प्यार ।।न मेरा रूप बिगाड़ो रेमनुज
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