हिंदी कविता

कहें सच अभी वो जमाना नहीं है

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कहें सच अभी वो जमाना नहीं है कहें सच अभी वो जमाना नहीं है।यहाँ सच किसी को पचाना नहीं है॥मिले जो अगर यूँ किसी को अँगाकर। खिला दो उसे तो पकाना नहीं है॥लगे लूटने सब निठल्ले यहाँ पर।उन्हें तो कमाना धमाना नहीं है॥मुसीबत अगर आ गई तो फँसोगे। यहाँ बच सको वो बहाना नहीं है॥पसीना बहाया यहाँ

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बाते सोलह आने सच है

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बाते सोलह आने सच है पानी के लिए कुँएँ बावली नल में होता है खूब जमावमहाराष्ट्र में लगा था धारा 144 देख कर भीड़ में टकराव पानी के स्रोतों के पास समूह नहीं हो सकते थे खड़ेजल संकट से जूझ रहे हैं धीरे धीरे राज्य छोटे बड़े आगे चल कर के पानी के लिए छिड़

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कविता मेरी ऐसी हो

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कविता मेरी ऐसी हो कविता मेरी  ऐसी होजिसमें हो कोई संदेश ।संतों की वाणी हो जिसमेंगीता का उपदेश ।गौतम हो गुरू नानक होहो उनकी गुरु वाणीगंगा जल की पवित्रता होमहानदी का पानी ।गंगा से सिंचित कविता कोमिले नया  परिवेश ।संतों की वाणी हो जिसमेंगीता का उपदेश ।लक्ष्मी बाई हो कविता मेंभगत सिंग  बलिदानी ।विस्मिल और

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जीवन की है परिभाषा

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जीवन की है परिभाषा अक्षर अक्षर भावों से  गुंजितकल्पना की मिठास है कविताकवि मन की मर्म अभिव्यंजनामृदु निर्झरित एहसास है कविता lसुख दुख से परिपूर्ण जीवन कीशब्द शक्ति की आशा है कवितारवि किरणों से भी सशक्त है येजीवन की है परिभाषा कविता lमन  हृदयभाव उद्गारों की  निधिकपोल कल्पित स्मित है कवितामरु को  भी  मधुमय  कर

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कविता क्या है?

हिंदी कविता

कविता क्या है? कम शब्दों में अधिक वर्णन कविता है ठेस लगी तो दुख का वर्णन कविता है भावनाओं का आकर्षक वर्णन कविता है शब्दों का तरंगित होना कविता है शब्दों का रोद्र हो जाना कविता है अनायास ही गुनगुनाना कविता है शब्दों का अनुशासित होना कविता है शब्दों का बहुआयामी होना कविता है शब्दों

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करना हो तो काम बहुत हैं

हिंदी कविता

करना हो तो काम बहुत हैं नेकी के तो धाम बहुत हैंकरना हो तो काम बहुत हैं।सोच समझ रखे जो बेहतरउनके अपने नाम बहुत हैं।प्रेम रंग गहरा होता हैरंगों के आयाम बहुत हैं।गुण सम्पन्न बहुत होते हैंवैसे तो बदनाम बहुत हैं।इश्क़ खुदा से सीधी बातेंमन हल्का आराम बहुत है।लक्ष्य एक पर पंथ अलग हैंसभी में

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हमारी भाग्य विधाता मां

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। हमारी भाग्य विधाता मां ना शब्द है ना कोई बात,जो मां के लिए लिख पाऊं,उसके चरणों में मैं,नित-नित शीश

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समय -देवता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय -देवता देव,दनुज,नाग,नर,यक्ष,सभीनित मेरी महिमा गाते हैं।सत्ता सबसे ऊपर मेरी,सब सादर सीस झुकाते हैं।।1 देव मैं महान शक्तिशाली,हूँ अजर,अमर,अविनाशी मैं।सर्वत्र मेरा ही शासन है,नित प्रवहमान एकदिशीय मैं।।2 मेरी प्रवाह के साथ-साथ,जो अपनी कदम बढ़ाते हैं।पुरुषार्थी,परिश्रमी जन ही,जीवन-फल लाभ उठाते हैं।।3 पूजते जन श्रद्धा-भक्ति से ,हरदम फल पाते मन सन्तोष।अति शीघ्र रीझ मैं जाता हूँ,जैसे देवों

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तू ही मेरा प्रारब्ध है माँ”

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। तू ही मेरा प्रारब्ध है माँ” वंदन अर्चन हे जन्मदायिनीसबसे  प्यारा  शब्द है   माँपहचान मेरी तेरे आँचल सेतू  ही 

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mother their kids

माँ तेरी ममता का कोई मोल नहीँ

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ तेरी ममता का कोई मोल नहीँ माँ तेरी ममता का कोई मोल नहीं।भू से भारी वात्सल्य तेरा, जिसका

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mother their kids

माँ पर कविता – अभिलाषा

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ पर कविता – अभिलाषा माँ तुम…………………………..दया ममता करुणा की मूरत हो…ईश्वर की सूंदर प्रतिकृति हो….सघन वन की घनी

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धरती माता रो रो कर करती यही पुकार

हिंदी कविता

धरती माता रो रो कर करती यही पुकार धरती माता रो रो कर करती  यही पुकार ।न मेरा रूप बिगाड़ो रे मनुज तुम  मुझे  संवारो ।।महल बना कर बड़े बड़ेतुम बोझ न मुझ पर डालो ।पेड़ पौधों को काट काटकर न पर्यावरण  बिगाड़ो।मैं हूँ सबकी भाग्य विधातासब जीवों से मुझे प्यार ।।न मेरा रूप बिगाड़ो रेमनुज

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