कहें सच अभी वो जमाना नहीं है
हिंदी कविताकहें सच अभी वो जमाना नहीं है कहें सच अभी वो जमाना नहीं है।यहाँ सच किसी को पचाना नहीं है॥मिले जो अगर यूँ किसी को अँगाकर। खिला दो उसे तो पकाना नहीं है॥लगे लूटने सब निठल्ले यहाँ पर।उन्हें तो कमाना धमाना नहीं है॥मुसीबत अगर आ गई तो फँसोगे। यहाँ बच सको वो बहाना नहीं है॥पसीना बहाया यहाँ
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