झुमका : प्यार के प्यार की निशानी

झुमका : प्यार के प्यार की निशानी

आज मैंने अपने तोहफे का बॉक्स निकाला,
जिसे बड़े सलीके से मैंने संभाल के रखा था,
आदत कहूं या तोहफे के प्रति मेरा लगाव
मैंने अपना हर एक तोहफा संभाल के रखा है बड़े प्यार से
और जब ये तोहफा आपके प्यार का दिया हो
तो उसके प्रति प्यार और बढ़ जाता है,


मेरे साथ भी ऐसा ही कुछ था मुझे बेहद प्यार है इन झुमकों से,
ये झुमके मेरे प्यार के प्यार की निशानी है,
और स्वाभाविक है कि मैंने उनके टूट जाने के डर से
उन्हें एक बॉक्स में बंद कर रख दिया,
जबकि चाहिए ये था कि मैं उन्हें पहनती,


उन्हें पहन के संवरती पर मैंने चुना उन्हें महज संभाल के रखना
और आज जब मैंने उन्हें संभाला एक लंबे अरसे के बाद
तो वो मुझे टूटे हुए मिले,
और मैं आहत हुई कि कैसे ये टूट सकते है
मैंने तो बहुत संभाल के बंद कर रखे थे,
पर बार बार उन्हें देखते हुए मन में.
आते हुए विचारों से झुंझते हुए समझ आया
कि क्या हमारे रिश्ते भी यू ही नहीं बिखर
जाते है झुमकों की तरह


जब हम उन्हें महज संभालने के नाम पर
रिश्तों के एहसासों को जज्बातों को दिल दिमाग
के किसी कोने में बंद कर रख देते है
जबकि झुमकों की ही तरह रिश्ता भी वक़्त मांगता है
जज्बातों की सार संभाल मांगता है किसी बन्द बॉक्स का कोना नहीं,
क्यों हम रिश्तों को प्यार से,
जज्बातों से वक़्त के साथ और नहीं संवार लेते,
क्यों उन्हें बंद कर रख देते है धीरे धीरे टूटने के लिए,
तो अब वक़्त रहते रिश्तों को भी वक़्त दिया जाए
उन्हें महज संभाल नहीं रखते है, उन्हें और संवारते है।

  • अदित्य मिश्रा ,  दिल्ली 
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