मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं- मनीभाई नवरत्न

मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं

प्रेम

मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं।
तुमसे हुए हर मुलाकातें सताते हैं ।
क्यों उस दिन अनजान रहा ,
तेरे चाहत का ना भान रहा ।
अब जब पता है तू ही लापता है ,

कैसे मिलू तुझे?
सोचकर हम घबराते हैं।
मुझे तेरी हर बातें ….

बीते कल में चेहरा तेरा खोजू,
आजकल मैं तेरी यादों में खोऊँ ।
ये सारी बातें आम हो गई ,
प्यार का इकरार खुलेआम हो गई।
अब कैसे बताएं कि हम कितना चाहते हैं।
मुझे तेरी …. तुझसे जुदा हुआ ,

मंजिले जुदा हुई ।
तू अगर ना मिला जिंदगी तबाह हुई ।
झलक तेरे पाने को मन मेरा बेचैन ।
प्यासे मेरे होंठ नहीं प्यासे हैं नैन।।
कैसे बुझे इनकी प्यास,
तेरी सूरत की आस लगाए रहते हैं ।
मुझे तेरी हर बातें…..

🖋 मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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