सद्व्यवहार – राकेश सक्सेना
हिंदी कविताधन –
क्षणिक सुख है
सदव्यवहार –
जीवन का सच्चा साथी है
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धन –
क्षणिक सुख है
सदव्यवहार –
जीवन का सच्चा साथी है
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इस कविता में जीवन संघर्ष के दौर में भी खुद पर भरोसा रखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया है |
घबराना नहीं है तुमको – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना के माध्यम से जीवन में फूलों के साथ काँटों के साथ जीने के लिए प्रेरित किया गया है और किसी भी स्थिति में न घबराने के लिए और संघर्ष के लिए प्रेरित किया गया है |
करो जो बात फूलों की – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता के माध्यम से बच्चों में संस्कार अगाने का प्रयास किया गया है | साथ ही बच्चों को अपने सपने कैसे साकार करना है और अपनी मंजिल कैसी प्राप्त करनी है हेतु प्रेरित किया गया है |
बात मेरी मान लो मेरे प्यारे बच्चों तुम – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता में वीरों की कुर्बानियों की ओर ध्यान केन्द्रित कराने की एक कोशिश की गयी है |
हंगामा क्यों कर रहे हो तुम – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता के माध्यम से जिन्दगी को एक अलग मुकाम पर स्थापित करने का एक प्रयास है |
आओ चलें कुछ दूर – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता के माध्यम से कवि अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है वर्तमान सामाजिक परिस्थितियां उसे सोचने को मजबूर कर रही हैं । दिल अब भी रोता है मेरा – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता के माध्यम से कवि उस खुदा/परमात्मा की इबादत में खुद को भूल जाना चाहता है ।
तेरे चरणों में पुष्प बनकर मैं बिखर जाऊं तो अच्छा हो- कविता – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता के माध्यम से कवि जीवन को बदल देने और दिशा देने का प्रयास कर रहा है ।
उसने देखा जीवन बदल देने का सपना- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना के माध्यम से मैं लोगों को परिश्रम हेतु प्रेरित करने का एक प्रयास कर रहा हूँ । साथ ही परिश्रम आपको जिंदगी में क्या मुकाम दिला सकता है इस ओर सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ । काम करो भाई काम करो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ – कविता – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
इस कविता के माध्यम से मैं जिंदगी के विभिन्न पहलुओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ ।
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मुझे वो अपना गुजरा ज़माना याद आया, कविता, अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम” –
यह रचना बचपन की यादों का एक झरोखा है । बचपन की खट्टी – मीठी यादों को पंक्तिबद्ध करने का एक प्रयास किया गया है ।
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