कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

ब्रह्मचर्य का सत्य: मनीभाई नवरत्न की आध्यात्मिक हिंदी कविता | गहन दार्शनिक रचना

समाज और यथार्थ

मनीभाई नवरत्न की कविता “ब्रह्मचर्य का सत्य” आत्म-संयम और आध्यात्मिक जागृति की गहन खोज करती है। पढ़ें यह प्रेरक और दार्शनिक रचना जो आत्मा की शुद्धता और सत्य की ओर ले जाती है।

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स्वप्नों के पार -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

स्वप्नों के पार सपनों की इस बगिया में, छिपा है एक रहस्य,नयन मूँदते ही खुलता, अंतरतम का दर्पण विशेष्य।जहाँ न कोई सीमा होती, न बंधन का नाम,केवल भाव बहते रहते, अंतर्मन की ध्वनि संग्राम।। चेतन की सीमाओं से, जब मन आगे जाए,अवचेतन की गहराई में, नयी दुनिया दिख जाए।वहाँ दबे हुए स्वप्नों का, होता है

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मातृभाषा बनाम माध्यम

हिंदी कविता

मातृभाषा बनाम माध्यम में शिक्षा का असली उद्देश्य क्या है? क्या अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाना ही शिक्षा का मापदंड है? और इसके क्या समाधान हो सकते हैं ? इस पर प्रकाश डालने की कोशिश की गई है । आज भारत में शिक्षा का अर्थ, माध्यम पर भारी होता जा रहा है। शहरों में दूर और

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महिला दिवस पर दोहा छंद / डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

महिला दिवस पर दोहा छंद / डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’ सृष्टि सृजन में है सदा, नारी का अनुदान।पुरुष बराबर कर्म कर, बनी देश की शान।। नारी देवी तुल्य है, ममता की भंडार।सदा संघर्ष कर रही, माने कभी न हार।। निज के पोषण के लिए, करती बाहर काज।अपने फर्ज निभा रही, गृहणी बनकर आज।। हर घर

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मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ;कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकरमैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ। मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ,मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ,जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते,मैं अपने मन का गान किया करता

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सीताराम सीताराम सीताराम कहिए

Uncategorized

सीताराम सीताराम सीताराम कहिए सीताराम सीताराम सीताराम कहिए।जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए।। 1. मुख में हो राम नाम, राम सेवा हाथ में,तू अकेला नहीं प्यारे, राम तेरे साथ में,विधि का विधान जान, हानि-लाभ सहिए।। 2. किया अभिमान तो फिर मान नहीं पाएगा,होगा वही प्यारे जो श्रीराम जी को भाएगा,फल आशा त्याग शुभ कर्म

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चाह गई चिंता मिटी

हिंदी कविता

चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।जिनको कछु न चाहिए, वे साहन के साह॥ रहीम कहते हैं कि किसी चीज़ को पाने की लालसा जिसे नहीं है, उसे किसी प्रकार की चिंता नहीं हो सकती। जिसका मन इन तमाम चिंताओं से ऊपर उठ गया, किसी इच्छा के प्रति बेपरवाह हो गए, वही राजाओं के राजा हैं।

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मेरी प्यारी हिन्दी / प्रभात सनातनी “राज’

हिंदी कविता

हिन्दी भारत की राजभाषा और विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक है। यह देवनागरी लिपि में लिखी जाती है और संस्कृत, फारसी, अरबी, तुर्की और अंग्रेज़ी जैसी भाषाओं से प्रभावित है। हिन्दी का साहित्यिक और व्यावहारिक रूप व्यापक है, जिसमें कविताएँ, कहानियाँ, उपन्यास, नाटक और तकनीकी लेखन शामिल हैं। यह भाषा भारतीय संस्कृति, परंपराओं

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संक्रांति पर कविता/ रेखराम साहू

प्रकृति और पर्यावरण

संक्रांति हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को कहा जाता है। वर्ष में कुल 12 संक्रांतियाँ होती हैं, लेकिन सबसे प्रमुख मकर संक्रांति मानी जाती है, क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। संक्रांति पर कविता                   मोह-मकर से मुक्ति-पथ,में गतिमयता,क्रांति।शपथ

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छेरछेरा पर कविता / राजकुमार ‘मसखरे

समाज और यथार्थ

छेरछेरा छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख लोक पर्व है, जिसे पौष मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन गाँवों में बच्चे और युवा घर-घर जाकर अन्न (धान) मांगते हैं और लोग खुशी-खुशी उन्हें दान करते हैं। इस पर्व का उद्देश्य समाज में दान-पुण्य और सहिष्णुता को बढ़ावा देना है। छेरछेरा पर कविता / राजकुमार

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विश्व हिंदी दिवस पर कविता / राकेश राज़ भाटिया

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

विश्व हिंदी दिवस पर कविता “यह हिंदी मन के हर भाव की भाषा है” स्नेह भरे हर मन से मन के यह लगाव की भाषा है। जो रिश्तों को अमृत देता है उस आव की भाषा है।।जब अधरों को छू जाती है, हृदय को जीत लेती है,यह हिंदी तो मन में उमड़ते हर भाव की

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क्या होगा / विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

क्या होगा हाथ हाथ को काट रहा है क्या होगा।भाई भाई को बांट रहा है क्या होगा।। कटना बंटना रास रहा है उसको तो,एक एक को छांट रहा है क्या होगा।। शेर  बकरियां एक घाट कैसे पीएं,नाम शेर के घाट रहा है क्या होगा।। खून लगा है छूरी पर भी भाई का,उस छूरी को चाट

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