तुममें राम कौन है?-राहुल लोहट
हिंदी कवितातुममें राम कौन है? मैदान खुला है,भीड़ बहुत है,जोर-जोर के जयकारे चीर रहे है आस्मां,दहन है विद्वान कामूर्खों के हाथों,सजा बार-बार क्यूं ?सवाल मन को खंगोलता है।मेरा कसूर क्या बहन की इज्जत रक्षा बस?आज जरूरत है हर घर में,मुझ जैसे रावण की लड़े जो अपनी बहन खातिरहैवानों से।जलाओ,जी भर के जलाओ,मगर इतना बताओ इस लबालब भीड़ में तुममें कौन राम है?खुले
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