कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

हाइकु

गीत अब कैसे लिखूं

हिंदी कविता

गीत अब कैसे लिखूं स्वप्न आंखों    में  मरे  हैं,पुहुप खुशियों के झरे  हैं,गीत  अब   कैसे   लिखूं।। सूखती सरिता नयन की,दिन फिरे चिंतन मनन की।अब  निभाता  कौन  रिश्ता,सात  जन्मों  के वचन की।।प्रिय जनों  के  साथ   छूटे,शेष   अपने    वही   रूठे।गीत  अब   कैसे    लिखूं।। हसरतों   के     झरे   पत्ते,वृक्ष  से   उघरे  हुए   हम।कर तिरोहित पुण्य पथ को,धूल  से  बिखरे  […]

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virah viyog bewafa sad women

श्याम चौपाई-पुष्पा शर्मा “कुसुम”

हिंदी कविता

श्याम चौपाई श्याम भक्ति मीरा मन भाई।दीन्हे सकल काज बिसराई ।।करहि भजन सेवा अरु पूजा।एक देव और नहीं दूजा।। नाचहि गावहि धरियहि  ध्याना ।प्रेम सहित गिरधर पति माना ।।सतत करहि सन्तन सन्माना।रचना कर गावहि पद नाना । राणा का जब कहा न मानाकुपित भये दीन्हे दुख नाना ।।चरणामृत कह विष भिजवाया ।पीवत मुदित परम सुख

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सरस्वती माता

सुप्रभात वंदन -नमन वंदन वीणावादनी

हिंदी कविता

सुप्रभात वंदन -नमन वंदन वीणावादनी नमन वंदन वीणावादनी,                 सुर नर मुनि जन पूजे ज्ञानी। वाणी में विराजती माता,                  माँ  शारदे  बड़ी  वरदानी।। राह सच जो चलता हमेशा,                  ज्ञान मातु नित नित वह पाया। मिले नित साहस लेखनी को,                  मातु शरण मैं तेरे आया।।                       …….भुवन बिष्ट

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तू कदम बढाकर देख

हिंदी कविता

•तू कदम बढाकर देख• मंजिल बुला रही है तू कदम बढाकर  देख खुशियाँ गुनगुना रही है तू गीत गाकर देख काँटे ही नहीं पथ में,फूल भी तुम्हें मिलेंगेपतझड़ का गम ना करना, गुलशन भी तो खिलेंगे बहारें बुला रहीं है, कोंपल लगाकर देख पीसती है जब वसुंधरातभी दामन होता है हरातप-तप कर अग्नि में ही

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मुसाफिर हैं हम जीवन पथ के

हिंदी कविता

मुसाफिर हैं हम जीवन पथ के मुसाफिर हैं हम जीवन पथ केराहें सबकी अलग-अलगधूप-छांव पथ के साथी हैंमंज़िल की है सबको ललक। राही हैं संघर्ष शील सबदामन में प्यार हो चाहे कसकपीड़ा के शोलों में है कोईकोई पा जाता खुशियों का फलक। मुसाफिर हूँ मैं उस डगर कीकाँटों पर जो नित रोज चलामधुऋतु हो या

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हाइकु

स्वालंबन पर कविता

हिंदी कविता

स्वालंबन पर कविता स्वालंबन है जीवन अवलंबनबिन स्वावलंब जीवन है बंधनस्वावलंबन ही है आत्मनिर्भरताबिन इसके जीवन दीप न जलता। स्वालंबन जग में पहचान कराताशिक्षा का सदुपयोग सिखातानिराशा में भी आशा भरताऊसर में भी प्रसून खिलाता। अपना दीपक स्वयं बनोस्वालंबन ही है सिखलाताजीने का दृष्टिकोण बदलनास्वालंबी है कर दिखलाता। स्वालंबन है आत्म अवलंबनआत्म अवलंबन जब आता

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deepak

नई उम्मीदें पर कविता

हिंदी कविता

नई उम्मीदें पर कविता मन में आशा के दीप जलाजीवन पथ पर बढ़ना है,उम्मीदें ही जीवन की पूंजीनया आसमान हमें पाना है। नई उम्मीदें संजीवनी जीवन कीसकारात्मक सोच जगाती हैंपथ प्रदर्शक है मनुज कीहौंसले बुलंद बनाती है। बिन उम्मीद मंजिल नहीं दिखतीराही पथभ्रष्ट हो जाता हैउम्मीदों का यदि दामन छोड़ानैराश्य भाव ही पाता है। पथरीला

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doha sangrah

तेरस के दोहे

हिंदी कविता

तेरस के दोहे आयें है संसार मे, करो नेक सब काम।यहीं कर्म का फल मिले, स्वर्ग नरक की धाम।। यत्न सदा करते रहो, मान नही तुम हार।हाथ सफल लगते गले, होत न श्रम बेकार।। बरफ जमी है यूँ जमी, ठिठुर गये सब अंग।कम्बल टोपी ले रखो, पहन ढ़ाक तन संग।। शीत लहर चलने लगी, बरस

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jivan doha

नयी सुबह पर कविता

हिंदी कविता

नयी सुबह पर कविता जिम्मेदारीयों कोकंधो पर बिठाकरकुछ कुछ जरूरतें पूरी करताख्वाहिशो कोआलमारी में बंद करकेगम छुपाकरचेहरे पर एक खामोश हंसीलाता ..सच मे नही है कोई शिकनमेरे माथे पर..क्योंकिबे-हिसाब उम्मीदो सेभरे है जेब मेरे..और अनगिनत ख़्वाब भीदेखे थे पहले कभी..ओह !यह क्या ?दिन निकल गया ये सब सोचते सोचतेअंधेरे ने फैला दियाअपना साम्राज्य फिर सेसच में रात

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हम परिन्दे

हिंदी कविता

हम परिन्दे हम परिन्देहम है मनमौजी सीमा न जाने।। हम परिन्दे घर न पहचाने घूमे अंजाने।। हम परिन्दे उड़ते पंख फैला देश न जानें ।। हम परिन्दे फिरे दरबदर बना लें घर।। हम परिन्देछू लेते आसमान ऊंची उड़ान ।। हम परिन्दे रहें खूब उड़ते नहीं थकते।। राकेश नमित

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yogasan

अब तरूणों को आना होगा

हिंदी कविता

अब तरूणों को आना होगा राष्ट्रवाद का अलख जगाने,अब तरूणों को आना होगा।भारत भू  की  रक्षा खातिर, रक्त बहाने आना होगा। आतंकी असुरों को हम, यूँ कब तक ऐसे झेलेंगे ….भस्मासुर सा नृत्य करा,उनका दिल दहलाना होगा। सोए देश के वीरों जागो,कुछ पहचानो अपने को।आत्म शक्ति जो खोया तुमने, फिर से उसे जगाना होगा। नव

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