कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

बसंत ऋतु का नवगीत

हिंदी कविता

बसंत ऋतु का नवगीत 🌿 🎵 नवगीत फागुन की पहली हँसी लिए,आया बसंत सुहाना है,सूनी डालों के अधरों परफिर से गीत सजाना है। पीली सरसों के आँचल मेंधूप सुनहरी सोई है,कोयल की कूक में जैसेमन की प्यास संजोई है। मंद बयार का कोमल स्पर्शतन-मन को छू जाता है,सूखी स्मृतियों की शाखों परहरापन उग आता है। […]

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पीली धूप का आमंत्रण

हिंदी कविता

पीली धूप का आमंत्रणआज आँगन में उतरी हैधीरे-धीरे,जैसे किसी माँ नेनींद से भरे बच्चे को सहलाकर जगाया हो। पीली धूप नेखिड़की पर दस्तक दी—“उठो…दिन तुम्हें पुकार रहा है।” सरसों के खेतों नेअपनी पीली चूनर फैलाई है,और हवा ने उसमेंसुगंध का संगीत भर दिया है। धूप कहती है—“मत रहो बंद कमरों में,बाहर आओ…जहाँ उम्मीदें खुली हवा

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बसंत की पहली साँस

हिंदी कविता

बसंत की पहली साँसधीरे से आई…जैसे किसी सोई हुई धरती के कानों मेंकिसी ने प्रेम से फुसफुसाया हो। ठिठुरती हवाओं के काँपते कंधों परजब धूप ने रख दिया अपना गरम हाथ,तभी कहीं दूरकोयल ने पहली बारमन का कोई अधूरा गीत गाया। सूखे पत्तों की थकी हुई सरसराहटअब हरियाली की उम्मीद में बदलने लगी है।कलियों ने

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तुम कितना अँधेरा पीछे छोड़ आए?

हिंदी कविता

तुम कितना अँधेरा पीछे छोड़ आए? अपने आप सेसिर्फ एक प्रश्न पूछो— क्यामेरे जीने का तरीकामेरे भीतर का अँधेराकम कर रहा है? बस यही दर्पण है।इसके अलावासब शोर है। यह मायने नहीं रखताकि पेट भरा है या नहीं,कपड़े कितने सिले-सजाए हैं,धन कितना जमा है,नाम कितना चमकता है। ये सब बाहर की दुनिया केआँकड़े हैं—और भीतर

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अतीत तभी रहता है, जब तुम उसे भोजन देते हो

हिंदी कविता

अतीत तभी रहता है, जब तुम उसे भोजन देते हो अतीतलड़ने से नहीं छूटता।उसे भूलने की कोशिश करना—उसे पकड़े रहने कासबसे पक्का तरीका है। तुम कहते हो—मैं इसे भूल जाना चाहता हूँ।और हर दिनयही कहते हुएतुम उसेयाद करते रहते हो। भूलने की इच्छा भीस्मरण काएक रूप है। मनभूलना जानता है।आज सुबह सेअब तकजो कुछ हुआ—क्या

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घाव भी मुस्कुरा सकते हैं

हिंदी कविता

घाव भी मुस्कुरा सकते हैं दर्द आएगा—यह कोई अपवाद नहीं,यह जीवन का स्वभाव है। तुम उसे रोकना चाहते हो,यही तुम्हारी भूल है।दर्द से नहीं,दर्द के विरोध सेपीड़ा जन्म लेती है। जब तुम कहते हो—“ऐसा नहीं होना चाहिए था”तभी अहंकारयथार्थ से लड़ने लगता है।और वही संघर्षदर्द को यातना बना देता है। दर्द को आने दो।उसे भीतर

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शांत—और इसलिए खतरनाक

हिंदी कविता

शांत—और इसलिए खतरनाक एक शांत मनुष्यकमज़ोर नहीं होता। वह खतरनाक होता है। क्योंकिउसके भीतरसंदेह नहीं होता—औरजिसे संदेह नहीं,उसे बहकाया नहीं जा सकता। उसके पासकुछ पाने कीजल्दी नहीं होती—औरजिसे कुछ पाना नहीं,उसे ग़ुलाम नहीं बनाया जा सकता। सच्चा विश्रामझूले में लटकना नहीं है।बिस्तर में सिमटना नहीं है। सच्चा विश्रामतूफ़ान के बीच स्थिर रहना है। पसीने में

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सफल हो रहे हो — या कब्ज़े में जा रहे हो?

हिंदी कविता

सफल हो रहे हो — या कब्ज़े में जा रहे हो? तुम सोचते होकि जीत रहे हो—पर असल मेंतुम्हें जीता जा रहा है। जिसे तुमदुनियावी सफलता कहते हो,वह अक्सर दुनिया कीतुम पर निर्दय जीत होती है। यह तुम्हाराविश्व पर विजय नहीं—यह विश्व कातुम्हें अपने कब्ज़े में ले लेना है। दुनियातुम्हें सिर्फ़ लुभाती नहीं।वह तुम्हें पालतू

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खुद को हराओ/ मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

दूसरों को हराने से पहलेएक युद्ध भीतर लड़ा जाता है।वहाँ न कोई तालियाँ होती हैं,न कोई गवाह—सिर्फ़ तुमऔर तुम्हारी आदतें।खुद को हरानाअपनी सुविधा को चुनौती देना है,अपने अहंकार सेआँख मिलाना है।यह जीतकिसी मंच पर नहीं चढ़ती,यह चुपचापचरित्र में उतरती है।जो अपने डर से भागता हैवह दूसरों को केवल दबा सकता है,हरा नहीं सकता।जो अपनी भूख

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दर्द के व्यापारी को देख लो/ मनीभाई नवरत्न

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द के व्यापारी को देख लो जिसे देखकरतुम अपने दर्द से लड़ते हो,जिसे पाकरतुम थोड़ी देर जी लेने की हिम्मत जुटाते हो—उसी दर्द का सौदागरतुम्हारे सामने मुस्कुरा कर खड़ा है। वह पहलेतुम्हारे भीतर एक कमी पैदा करता है,फिर उसी कमी का इलाज बनकर आता है।वह घाव देता हैऔर मरहम की कीमत तय करता है।तुम्हारी बेचैनीउसकी

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पहला प्रेम / मनीभाई नवरत्न

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

पहला प्रेम हमारा पहला प्रेमनहीं होना चाहिए किसी और से ।वह होना चाहिए हमारीअपनी ही सर्वोच्च संभावना से —एक उग्र, अडिग, अविराम प्रेम। प्रेम की गुणवत्तानहीं हो सकती अलगहमारे जीवन की गुणवत्ता से ।यदि औसतपन मेंजीवन भीगा हुआ है,तोकैसे दिव्य होगा प्रेम?पर हम तो चाहते हैंपरीकथाओं जैसा प्रेम—और स्वयं डरे हुए,लालची, छोटे जीवन जीते हैं।

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सच्चा प्रेम / मनीभाई नवरत्न

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

सच्चा प्रेम सच्चा प्रेमसुख नहीं देता।वह परीक्षा लेता है।खींचता है।तोड़ता है।वह शिल्पकार की छेनी है—जो निर्दयता सेअनगढ़ पत्थर पर पड़ती है,जब तकरूप प्रकट न हो जाए। जो तुम्हेंपूर्ण संतोष दे सकता है,वह तुम्हेंवैसा ही रहनेकभी नहीं देगाजैसे तुम हो।विस्तारकेवल विस्तृत कोमिलता है।और विस्तृत होने के लिएतुम्हें छोटा होनाछोड़ना पड़ेगा। तुम वही बनते होजिसे तुम सच

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