कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

विश्व कविता दिवस

विश्व कविता दिवस/डॉ0 रामबली मिश्र

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

विश्व कविता दिवस/डॉ0 रामबली मिश्र प्रति पल कविता दिवस मनाता।हिन्दी में लिखना सिखलाता।।मन मन्दिर में ध्यान लगाता।सबको उत्तम राह दिखाता।। अंतर्मन के भाव गमकते।शब्दों के आह्लाद चहकते।।अर्थ बताते सत्य पंथ गह।स्नेह परस्पर का मतलब कह।। कविता लिख कर मन बहलाता।जीवन को खुशहाल बनाता।।लेखन ही सत्कर्म धर्म है।जीवन का य़ह शिष्ट मर्म है।। हिन्दी में जो

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पर्यावरण दिवस पर कविता

पर्यावरण दिवस पर कविता /मंजूषा दुग्गल

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

पर्यावरण दिवस पर कविता/मंजूषा दुग्गल जलाकर पेड़-पौधे वीरान धरती को बना रहे हैं  इतनी सुंदर सृष्टि का भयावह मंजर बना रहे हैं  काटकर जंगल पशु-पक्षियों को बेघर बना रहे हैं  कर बेइंतहा अत्याचार हम दिवस पर्यावरण मना रहे हैं । वैज्ञानिक उन्नति की राह पर हम कदम बढ़ा रहे हैं चाँद पर भी अब देखो

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पर्यावरण की रक्षा

पर्यावरण की रक्षा/कामरान

हिंदी कविता

पर्यावरण की रक्षा/कामरान दूषित है पूरा संसारआया मन में है विचारप्लास्टिक का करें बहिष्कारदेखेगा अब पूरा संसारपेट्रोलियम का करे कम उपयोगबंद करें सारे उद्योगअपने नाम से एक पेड़ लगाओजीवन में कुछ अच्छा कर जाओहम करें पर्यावरण की रक्षावह करेगा हमारी सुरक्षाआओ मिलकर पर्यावरण बचाएंजीवन को खुशहाल बनाएं।

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दौलत पर कविता

दौलत पर कविता /डॉ0 रामबली मिश्र

हिंदी कविता

दौलत पर कविता /रामबली मिश्र दौलत जिसके पास है, उसे चाहिए और।और और की चाह में,कभी न पाता ठौर ।। दौलत ऐसी भूख है,भरे न जिससे पेट।दौलत करे मनुष्य का,रातोदिन आखेट।। दौलत के पीछे सदा,भाग रहा इंसान।मृग मरीचिका सी बनी,मार रही है जान।। यदि दौलत संतोष की, जीवन है आसान।थोड़े में भी पूर्ण हों,जीवन के

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नन्हा मुन्ना राही हूँ देश का सिपाही हूँ बाल गीत

देशभक्ति, हिंदी कविता

“नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ” यह एक प्रसिद्ध हिंदी बाल गीत है जो बच्चों के बीच प्रसिद्ध है। यह गीत देशभक्ति की भावना को उत्तेजित करता है और बच्चों को अपने देश के प्रति प्रेरित करता है। नन्हा मुन्ना इस गीत में एक बच्चे को संदेश देता है कि वह अपने देश

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tree

वृक्ष लगाएं धरती बचाएं/ नीलम त्यागी ‘नील’

प्रकृति और पर्यावरण

“वृक्ष लगाएं, धरती बचाएं” एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि हमें पर्यावरण की संरक्षण के लिए वृक्षारोपण का समर्थन करना चाहिए। वृक्ष लगाना हमारे पर्यावरण के सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि वृक्ष प्राकृतिक रूप से हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वायु में कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं, और पर्यावरण के साथ हमारे

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struggle

प्रेरक कविता/ डॉ0 रामबली मिश्र

हिंदी कविता

“बिना संघर्ष कुछ नहीं मिलता” हमें बताती है कि हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयास करना और संघर्ष करना होता है। जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हमें समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और उन्हें पार करने के लिए हमें मेहनत, संघर्ष, और साहस की आवश्यकता होती है।

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पर्यावरण को नुकसान पर कविता

पर्यावरण को नुकसान पर कविता /एस के कपूर श्री हंस

प्रकृति और पर्यावरण

पर्यावरण को नुकसान पर कविता /एस के कपूर श्री हंस 1 नदी ताल में कम हो  रहा जल  हम पानी यूँ ही बहा रहे हैं। ग्लेशियर पिघल रहेऔर समुन्द्र तल यूँ बढ़ते ही जा रहे हैं।। काट    सारे वन कंक्रीट के कई जंगल बसा दिये विकास ने। अनायस विनाश की ओर कदम दुनिया के

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सरस्वती वंदना

सरस्वती वंदना/डॉ0 रामबली मिश्र

नारी जीवन और संवेदना

सरस्वती वंदना/डॉ0 रामबली मिश्र दिव्य मधुर रस देनेवाली।कष्ट क्लेश को हरनेवाली।।चेतन सत्ता ज्ञानामृत हो।बनी लेखिका सत शुभ कृत हो।। अंतर्दृष्टि सहज देती हो।मिथ्या भ्रम को हर लेती हो।।सत्कर्मों की शिक्षा देती।प्रेम पंथ की दीक्षा देती।। क्षिति जल पावक गगन समीरा।सबमें रहती बनी सुधीरा।।परम विज्ञ ब्रह्माणी तुम हो।कला प्रवीण भव्य प्रिय तुम हो।। वरप्रदा नित कामरूप

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पर्यावरण को नुकसान पर कविता

ईश्वर की दी धरोहर हम जला रहे हैं/मनोज कुमार

हिंदी कविता

ईश्वर की दी धरोहर हम जला रहे हैं/मनोज कुमार ईश्वर की दी हुई धरोहर हम जला रहे हैंलगा के आग पर्यावरण दूषित कर रहे हैंकाटे जा रहे हैं पेड़ जंगलों के,सुखा के इन्सान खुश हो रहा हैआते – जाते मौसम बिगाड़ रहा है हरी- भरी भूमि में निरंतर रसायन मिला रहा हैअपने ही उपजाऊ भूमि

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JALATI DHARATI

विश्व प्रदूषित हो रहा /प्रेमचन्द साव “प्रेम”,बसना

हिंदी कविता

विश्व प्रदूषित हो रहा / प्रेमचन्द साव “प्रेम”,बसना विश्व प्रदूषित हो रहा,फैल रहा है रोग।मानव सारे व्यस्त है,करने निज सुख भोग।। प्राणवायु दूषित हुआ,दूषित हर जल बूँद।मानव को चिंता कहाँ ?,बैठा अँखियन मूँद।। ताल तलैया कूप को,मनुज रहे अब पाट।निज स्वारथ के फेर में,वृक्ष रहे हैं काट।। धूल-धुआँ कूड़ा बढ़ा,बढ़ा मनुज का लोभ।फिर जीवन संघर्ष

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shiv God

शिवरात्रि पर कविता /डॉ0 रामबली मिश्र

हिंदी कविता

शिवरात्रि पर कविता /डॉ0 रामबली मिश्र अद्वितीय शिव भोले काशी।अदा निराली प्रिय अविनाशी।।रहते सबके अंतर्मन में।बैठे खुश हो नित सज्जन में।। जगह जगह वे घूमा करते।तीन लोक को चूमा करते।।भस्म लगाये वे चलते हैं।शुभ वाचन करते बढ़ते हैं।। परम दिव्य तत्व रघुवर सा।कोई नहीं जगत में ऐसा।।रामेश्वर शंकर का धामा।विश्व प्रसिद्ध स्वयं निज नामा।। बहुत

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