कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

शब्दों की महत्ता पर कविता

हिंदी कविता

शब्दों की महत्ता पर कविता चुभते हैं कुछ शब्द,चूमते हैं कुछ शब्द /शब्दकोश से निकलकर,भावनाओं की गली से-गुजरते हैं,और पाते हैं अर्थ,कहीं अनमोल,कहीं व्यर्थ ।संगति का प्रभावतो पड़ता ही है।कितने जीवंत रहे होंगे !शब्द जब भाव ने-दिया होगा जन्म ।पर प्रदूषित परिवेश की-परवरिश ने कर दिया –जर्जर,दुर्बल और तिरस्कृत।गलत हाथों में है मशालें,रोशनी के लिए […]

शब्दों की महत्ता पर कविता Read More »

चौपाई छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

चौपाई छंद [सम मात्रिक] विधान – इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्रा होती हैं , अंत में 21 या गाल वर्जित होता है , कुल चार चरण होते हैं , क्रमागत दो-दो चरण तुकांत होते हैं l उदाहरण :बिनु पग चलै सुनै बिनु काना,कर बिनु करै करम विधि नाना lआनन रहित सकल रस भोगी,बिनु बानी

चौपाई छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें Read More »

श्रृंगार छंद [सम मात्रिक]कैसे लिखें

हिंदी कविता

श्रृंगार छंद (उपजाति सहित) [सम मात्रिक] विधान – इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्रा होती हैं, आदि में क्रमागत त्रिकल-द्विकल (3+2) और अंत में क्रमागत द्विकल-त्रिकल (2+3) आते हैं, कुल चार चरण होते हैं , क्रमागत दो-दो चरण तुकांत होते हैं l उदाहरण :भागना लिख मनुजा के भाग्य,भागना क्या होता वैराग्य lदास तुलसी हों चाहे

श्रृंगार छंद [सम मात्रिक]कैसे लिखें Read More »

पदपादाकुलक/राधेश्यामी/मत्तसवैया छंद [सम मात्रिक]

हिंदी कविता

पदपादाकुलक/राधेश्यामी/मत्तसवैया छंद [सम मात्रिक] विधान – पदपादाकुलक छंद के एक चरण में 16 मात्रा होती हैं , आदि में द्विकल (2 या 11) अनिवार्य होता है किन्तु त्रिकल (21 या 12 या 111) वर्जित होता है, पहले द्विकल के बाद यदि त्रिकल आता है तो उसके बाद एक और त्रिकल आता है , कुल चार

पदपादाकुलक/राधेश्यामी/मत्तसवैया छंद [सम मात्रिक] Read More »

राधिका छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

राधिका छंद [सम मात्रिक] विधान – इसके प्रत्येक चरण में 22 मात्रा होती हैं, 13,9 पर यति होती है, यति से पहले और बाद में त्रिकल आता है, कुल चार चरण होते हैं , क्रमागत दो-दो चरण तुकांत होते हैं l उदाहरण :मन में रहता है काम , राम वाणी में,है भारी मायाजाल, सभी प्राणी

राधिका छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें Read More »

कुण्डल/उड़ियाना छंद [सम मात्रिक]

हिंदी कविता

कुण्डल/उड़ियाना छंद [सम मात्रिक] विधान – इसके प्रत्येक चरण में 22 मात्रा होती हैं, 12,10 पर यति होती है , यति से पहले और बाद में त्रिकल आता है औए अंत में 22 आता है l यदि अंत में एक ही गुरु 2 या गा आता है तो उसे उड़ियाना छंद कहते हैं l कुल

कुण्डल/उड़ियाना छंद [सम मात्रिक] Read More »

चौपाई आधारित छंद कौन कौन से है

हिंदी कविता

चौपाई आधारित छंद :16 मात्रा के चौपाई छंद में कुछ मात्राएँ घटा-बढ़ाकर अनेक छंद बनते है l ऐसे चौपाई आधारित छंदों का चौपाई छंद से आतंरिक सम्बन्ध यहाँ पर दिया जा रहा है l इससे इन छंदों को समझने और स्मरण रखने में बहुत सुविधा रहेगी l *चौपाई – 1 = 15 मात्रा का चौपई

चौपाई आधारित छंद कौन कौन से है Read More »

कुण्डलिनी छंद [विषम मात्रिक ]कैसे लिखें

हिंदी कविता

कुण्डलिनी छंद [विषम मात्रिक ] विधान – दोहा और अर्ध रोला को मिलाने से कुण्डलिनी छंद बनता है जबकि दोहा के चतुर्थ चरण से अर्ध रोला का प्रारंभ होता हो (पुनरावृत्ति) l इस छंद में यथारुचि प्रारंभिक शब्द या शब्दों से छंद का समापन किया जा सकता है (पुनरागमन), किन्तु यह अनिवार्य नहीं है l

कुण्डलिनी छंद [विषम मात्रिक ]कैसे लिखें Read More »

कुण्डलिया छंद [विषम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

कुण्डलिया छंद [विषम मात्रिक] विधान – दोहा और रोला को मिलाने से कुण्डलिया छंद बनता है जबकि दोहा के चतुर्थ चरण से रोला का प्रारंभ होता हो (पुनरावृत्ति) तथा प्रारंभिक शब्द या शब्दों से ही छंद का समापन हो (पुनरागमन) l दोहा और रोला छंदों के लक्षण अलग से पूर्व वर्णित हैं l कुण्डलिया छंद

कुण्डलिया छंद [विषम मात्रिक] कैसे लिखें Read More »

विष्णुपद छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

विष्णुपद छंद [सम मात्रिक] विधान – 26 मात्रा, 16,10 पर यति, अंत में वाचिक भार 2 या गा l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l उदाहरण :अपने से नीचे की सेवा, तीर-पड़ोस बुरा,पत्नी क्रोधमुखी यों बोले, ज्यों हर शब्द छुरा। बेटा फिरे निठल्लू बेटी, खोये लाज फिरे,जले आग बिन वह घरवाला, घर पर

विष्णुपद छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें Read More »

रूपमाला/मदन छंद [सम मात्रिक]

हिंदी कविता

रूपमाला/मदन छंद [सम मात्रिक] विधान – 24 मात्रा, 14,10 पर यति, आदि और अंत में वाचिक भार 21 गाल l कुल चार चरण , क्रमागत दो-दो चरणों में तुकांत l उदाहरण :देह दलदल में फँसे हैं, साधना के पाँव,दूर काफी दूर लगता, साँवरे का गाँव lक्या उबारेंगे कि जिनके, दलदली आधार,इसलिए आओ चलें इस, धुंध

रूपमाला/मदन छंद [सम मात्रिक] Read More »

त्रिभंगी छंद [सम मात्रिक]

हिंदी कविता

त्रिभंगी छंद [सम मात्रिक] विधान – 32 मात्रा, 10,8,8,6 पर यति, चरणान्त में 2 गा l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l पहली तीन या दो यति पर आतंरिक तुकांत होने से छंद का लालित्य बढ़ जाता है l तुलसी दास जैसे महा कवि ने पहली दो यति पर आतंरिक तुकान्त का अनिवार्यतः

त्रिभंगी छंद [सम मात्रिक] Read More »

Scroll to Top