doha sangrah

विजय पर्व दशहरा

हिंदी कविता

विजय पर्व दशहरा : किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व

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अब तो मन का रावण मारें

हिंदी कविता

किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल

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रावण दहन पर कविता

हिंदी कविता

किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल

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दशहरा पर कविता

हिंदी कविता

किसी भी राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास के लिए विद्या और शक्ति दोनों देवियों की आराधना और उपासना आवश्यक है। जिस प्रकार विद्या की देवी सरस्वती है, उसी प्रकार शक्ति की देवी दुर्गा है। विजया दशमी दुर्गा देवी की आराधना का पर्व है, जो शक्ति और साहस प्रदान करती है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल

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कन्या पूजन पर कविता

हिंदी कविता

कन्या पूजन पर कविता –दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। कन्या पूजन पर कविता नव दुर्गा के नौ रूपों कामैं

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आश्विन नवरात्रि पर विशेष गीत

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। आश्विन नवरात्रि पर विशेष गीत जय हो जय हो दुर्गे मैया महाशक्ति अवतारी।भक्ति

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jai durga maa

दुर्गा चंडी काली हो / डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा चंडी काली हो भारत भू के माथे की तुम,रोली कुमकुम लाली हो।फल फूलों से लदी हुई तुम,ही तो सुरभित डाली

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दर्शन दे द मैया- भोजपुरी देवी गीत

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दर्शन दे द मैया – भोजपुरी देवी गीत कहवाँ रहेलू मैयाखोजेला बलकवातोहरे दरश खातिरउठेला ललकवातोहरा बिना मैयाजिंदगी भईल बा उजाड़हो…..दर्शन दे

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शक्ति वंदना

नारी जीवन और संवेदना

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। शक्ति वंदना करूणाकर कौमारी माता कलिकाकारी तुम्हारी जय हो। खरलखड्ग खट हाथमें हरदम हेखलहारी तुम्हारी जय हो।गोमती गंगा गोदावरी गौरी गदाधारी

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भाग्य मुकद्दर नसीब पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

भाग्य/मुकद्दर/नसीब पर कविता- सोरठा छंद कर्म लिखे का खेल, भाग्य भूमि जन देश का।कौरव कुल दल मेल, करा न माधव भी सके।। लक्ष्मण सीताराम, भाग्य लेख वनवास था।छूट गये धन धाम, राजतिलक भूले सभी।। पांचाली के भाग्य, पाँच पति जगजीत थे।भोगे वन वैराग्य, कृष्ण सखी जलती रही।। कहते यही सुजान, भाग्य बदलते कर्म से।जग में

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तथाकथित श्रेष्ठता

हिंदी कविता

तथाकथित श्रेष्ठता मुंडेर को था घमंड अपनी श्रेष्ठता पर देहली पर बड़ी इतराईबड़ी लफ्फाजी कीबड़ी तानाकशी कीअपनी उच्चता केमनगढ़ंत दिए प्रमाण ताउम्र उसी देहली पर चढ़कर खड़ी रही मुंडेर जिसको वहकमतर व नीचीकहती न थकी एक दिन आया जलजलाचरमरा कर ढह गई मुंडेर आ कर गीरीदेहली के पास छू मंत्र हो गई तथाकथित श्रेष्ठता। -विनोद

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आज यह कैसी घड़ी

हिंदी कविता

भीड़ अब आगे बढ़ी, स्वार्थ में खूब अड़ीतंत्र हो गया घायल, आज यह कैसी घड़ी। कौन चोर कौन चौकीदार, पता नहीं चले यहाँअपनों के बीच खड़ी दुनिया, लगती कुटिल है यहाँभोले- भाले भूखे- प्यासे, बेघर हो घूमें जहाँआँखों में आँसू हैं उनके, हाय अब जाएँ कहाँ नीति भी सिर पर चढ़ी, हाथ में जादू- छड़ीकहीं

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