कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

नशा नाश करके रहे- विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

यहां पर नशा नाश करके रहे , जो कि नशा मुक्ति पर लिखी गई विनोद सिल्ला की कविता है। नशा नाश करके रहे नशा नाश करके रहे,नहीं उबरता कोय।दूर नशे से जो रहे, पावन जीवन होय।। नशा करे हो गत बुरी, बुरे नशे के खेल।बात बड़े कहकर गए,नशा नाश का मेल।। नशा हजारों मेल का, […]

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doha sangrah

प्लास्टिक मुक्त दिवस पर दोहे-अंचल

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

आज प्लास्टिक ने हमारे पर्यावरण के लिए बहुत खतरा पैदा कर दिया है। तो जनजागृति हेतु यहां पर प्लास्टिक मुक्त दिवस पर दोहे दिया गया है प्लास्टिक मुक्त दिवस पर दोहे पन्नी की उपयोगिता,करें बन्द तत्काल।खतरा जीवन के लिए,जीना करे मुहाल।। धीमा विष है जगत में ,सेहत करे प्रभाव।आओ इनसे सब करें,रिस्ता खत्म लगाव।। जहर

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छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ये नारा बड़ अच्छा लगथे!ये नारा बनइया के मन भरमोर पैलगी करे के मन करथे !! जब छत्तीसगढ़िया मन..गुजराती लॉज/राजस्थानी लॉज म रुकथेहरियाणा जलेबी,बंगाली चाय के बड़ाई करथे बड़ अच्छा लगथे .!! जब छत्तीसगढ़िया मन.अपन घर म कोनों काम-कारज ल धरथेतब बीकानेर/जलाराम ले मन भर खरीदी करथेबड़ अच्छा लगथे!! जब

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दारू विषय पर कविता

हिंदी कविता

दारू विषय पर कविता दारू पिये ल झन जाबे समारूदारू पिये ल झन जाबे,,,,गली-गली जूता खाबे समारू दारू पिये ल झन जाबे ,,,,! नाली म परे,माछी ह झूमेमुँहू तैं फारे,कुकुर ह चूमेअब सुसु बर होगे *उतारू* समारूदारू पिये ल झन जाबे……! पिये ल बइठे,सङ्गी ह लूटेझगरा मताये,धर-धर कूटेबस मंदू ह देवय *हुँकारू* समारूदारू पिये ल

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औरत पर कविता -हरभगवान चावला

हिंदी कविता

औरत पर कविता औरत को थोड़ा सुख मिलतातो चेहरे पर झलक जातादुख का उसके चेहरे सेबहुत देर तकपता ही नहीं चलता थासबको खिलाने के बादजो बचता, वो खातीऔर सुखी हो जातीसुखी गृहस्थी का यह सुखउसने छुटपन मेंगुड्डे गुड़ियों के ब्याह से सीखा था। – हरभगवान चावलासिरसा, हरियाणा

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doha sangrah

भाई पर दोहे / विनोद सिल्ला

मन और भावनाएँ

विनोद सिल्ला के दोहे भाईचारे की अनमोल भावना को व्यक्त करते हैं। ये दोहे पाठकों को रिश्तों के महत्व को समझने और उन्हें सहेजने की प्रेरणा देते हैं। भाई के प्रति सच्चे प्रेम और सम्मान की भावना को व्यक्त करते हुए, ये दोहे भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं, जो भाईयों के बीच के अटूट

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राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस-उपमेंद्र सक्सेना एड०

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस जीवन में आखिर कब तक हम, बोलो स्वस्थ यहाँ रह पाएँबीमारी से पीड़ित हों तो, काम डॉक्टर साहब आएँ। मानव तन इतना कोमल है, देता है सबको लाचारी तरह -तरह के रोगों से अब, घिरे हुए कितने नर- नारी बेचैनी जब बढ़ जाती है, रात कटे तब जगकर सारीबोझ लगे जीवन जब

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स्कूल पर कविता

हिंदी कविता

विषय – स्कूल पर कविता स्कूल का दहलीज पुकारता है बीत गए गर्मी की छुट्टी,अब तो तुम आजाओ, क्या-क्या किए हैं,इस छुट्टी में हमे भी बताओ। श्याम-पट्ट,स्कूल की वो घंटी तुम्हें निहारता है, प्यारे बच्चों तुम्हें,स्कूल का दहलीज पुकारता है। गर्मी-छुट्टी में घुम लिए हैं,बच्चे अपने ननिहाल, गांव-शहर में सैर करके,देखें हैं सुखे,नदी-ताल। अब तो

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बेरोजगार पर दोहे – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

बेरोजगार पर दोहे पढ़-पढ़ पोथी हो गए, सभी परीक्षा पास। रोजगार मिलता नहीं, टूटी जीवन आस।। उपाधियां तो मिल गई, नहीं मिला है काम।मिल तो जाती नौकरी, दे पाते गर दाम।। बेकारी सबसे बुरी, हर लेती है मान।सारा जीवन व्यर्थ सा, रहे कष्ट में जान।। रोजगार देंगे तुझे, वादे करते रोज।मतपेटी लेते भरा, करते हैं

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आदमी और कविता – हरदीप सबरवाल

हिंदी कविता

आदमी और कविता – हरदीप सबरवाल द्वारा रचित आज के कविताओं के विषय पर यथार्थ और करारा व्यंग्य किया गया है।

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भावनाओं को कुछ ऐसा उबाल दो- रामकिशोर मेहता

मन और भावनाएँ

भावनाओं को कुछ ऐसा उबाल दो भावनाओं को कुछ ऐसा उबाल दो।जनता न सोचेसत्ता के बारे में,उसके गलियारे में,नित नयेसवाल कुछ उछाल दो। खड़ा कर दोनित नया उत्पात कोई।भूख और प्यास कीकर सके न बात कोई।शान्ति से क्यों सांस ले रहाकोई शहर।घोल दो हवाओं मेंनित नया जहर। अट्टालिकाओं की तरफउठे अगरकोई नजरदूर सीमाओं पर उठा

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