कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

नीलम नारंग की कवितायेँ

हिंदी कविता

नीलम नारंग की कवितायेँ दवा बन जा ले दर्द सारे किसी के लिए दवा बन जालेकर गम बस उसीका हमनवाँ बन जा सुन किसी के दिल की बात शिद्दत सेप्यार से समझा और राजदाँ बन जा काम आ दूसरों के सोच गम की बातदेकर साथ सब का खैरखवाह बन जा सुन दुख किसी का बस […]

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दवा बन जा-नीलम नारंग

हिंदी कविता

दवा बन जा ले दर्द सारे किसी के लिए दवा बन जा लेकर गम बस उसीका हमनवाँ बन जा सुन किसी के दिल की बात शिद्दत सेप्यार से समझा और राजदाँ बन जा काम आ दूसरों के सोच गम की बात देकर साथ सब का खैरखवाह बन जा सुन दुख किसी का बस हँसते है

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क्रान्ति की राह पर -प्रकाश गुप्ता हमसफ़र

हिंदी कविता

*” क्रान्ति की राह पर ”**- – – – – – – – – – – – – -* हमारे ज़िस्म कोबोटी-बोटी काट करहमारी ज़िन्दा रूह कीचीखों को निकालकरहमारे ख़ौलते खून कोऔर ज़रा उबालकरहमारे भीतर केइंसान को भी मारकरतुम बाँट देनाहाँ-हाँ! – – – –तुम बाँट देनाशिक्षा के मठाधीशोंक्रूरता के तानाशाहोंपाखंड के ठेकेदारोंऔर – –

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संस्कारों का आधुनिकीकरण- पद्ममुख पंडा महापल्ली

समाज और यथार्थ

“संस्कारों का आधुनिकीकरण” बचपन से ही है मेरी नजरसमाज के रहन सहन परखान पान;जीवन शैलीसंस्कारों की है जो धरोहर अपनी संस्कृति है ऐसीसुंदर और मनोहरजो यह कहती हैसंपूर्ण विश्व है अपना घर भारतीय परंपरा मेंसुबह चरण स्पर्श करबच्चे पाठशाला जातेमात पिता के आशीष लेकर पर पाश्चात्य सभ्यता काअब हो रहा है असरजिसका पड़ रहा दुष्प्रभावहमारे

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village based Poem

मेरा गाँव – एस के नीरज

हिंदी कविता

*मेरा गाँव* तपती दुपहरी सूनी सड़कें पेड़ की छाँवयाद आया गाँवगाँव की गलियाँपनघट पर पानी भरती वो छोरियाँलड़कों की टोली तालाब में लोटतेभैंसों की पीठ पर करते हुए सवारी कागज की वो नाँववाह मेरा गाँवयाद आता है ….! सील बट्टे पर पिसाधनिया की चटनी चूल्हे का खाना सुराही का पानी अल्हड़ नादानी नानी की कहानी

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विश्व रिकार्ड के मायने –राजकुमार मसखरे

समाज और यथार्थ

विश्व रिकार्ड के मायने कोई गीत गा करकोई साज बजा करकोई नृत्य करा करकोई लाखो दीप सजा करकोई ऊँचा रावण जला करकोई कुछ कविता बना करकोई गाड़ी फर्राटे चला कर !अरे मुझे ये तो बताओये विश्व रिकार्ड बना करसमाज को क्या संदेश दिएकिस ग़रीब का भला कियेकिस बेटी का हाथ पीला कियेकिस बीमार का इलाज

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मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊँ-उपमेंद्र सक्सेना

समाज और यथार्थ

मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊँ जिससे अपना मतलब निकला, क्यों मैं उसके लात लगाऊँदुनिया का सिद्धांत अनोखा, मेरी बिल्ली मुझसे म्याऊँ। मगरमच्छ के आँसू गिरते, जब वह सुख से भोजन करताबगुला भगत यहाँ पर देखो,अपनों पर यों कभी न मरता जिस थाली में भोज खिलाया, क्यों मैं उसमें छेद बनाऊँदुनिया का सिद्धांत अनोखा, मेरी बिल्ली मुझसे

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अब तो भर्ती-विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

अब तो भर्ती अब तो भर्ती खोलिए, बहुत हुआ सरकार। पढ़-लिखकर हैं घूमते, युवा सभी बेकार।। नयी-नयी नित नीतियां, सत्ता ने दी थोप।रोजगार की खोज में, चले युवा यूरोप।। जितना जो भी है पढ़ा, दे दो वैसा काम।वित पोषण हो देश का, सुखी रहे आवाम।। पढ़-लिखकर भी बन रहे, मजबूरन मजदूर। ठोकर दर-दर खा रहे,

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खुशनसीब -माधुरी डड़सेना मुदिता

हिंदी कविता

खुशनसीब मैं खुशनसीब हूँ कि मुझे यार मिल गया दिल को बड़ा सकूं है दिलदार मिल गया । दर दर भटक रहे थे कभी हम यहाँ वहाँअब डर नहीं किसी से सरकार मिल गया । हमराज बन गए हैं दिन रात अब नयारंगत बहार में है इतबार मिल गया । दुनिया बड़ी ही जालिम जीने

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आओ गिलहरी बनें -डाॅ.संजय जी मालपाणी

हिंदी कविता

आओ गिलहरी बनें सागर पर जब सेतु बना था, गिलहरी ने क्या काम किया था जहां-जहां भी दरार रहती, उसने उसको मिटा दिया था वैसे तो वह छोटी सी थी, राम कार्य में समर्पित थी रेती उठाकर चल पड़ती थी, अथक निरंतर प्रयासरत थी प्रभु ने जब उसको था देखा, हाथ घुमाया बन गई रेखा

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राजनीति बना व्यापार जी – राजकुमार मसखरे

हिंदी कविता

राजनीति बना व्यापार जी देखो आज इस राजनीति ककैसे बना गया ये व्यापार जी ,लोक-सेवक अब गायब जो हैंमिला बड़ा उन्हें रोज़गार जी !राजनीति अब स्वार्थ- नीति हैकर रहे अपनों का उपकार जी,कुर्सी में चिपके रहने की लतबस एक ही इनका आधार जी !चमचा बनो व जयकारा लगाओफ़लफूल रहा है ये बाज़ार जी,छुट-भैये नेता पीछे

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गुलबहार -माधुरी डड़सेना

हिंदी कविता

गुलबहार होश में हमीं नहीं सनम कभी पुकार अबहो तुम्हीं निगाह में हमें ज़रा निहार अब । वक़्त की फुहार है ये रोज़ की ही बात है दिल मचल के कह रहा मुझे तुम्हीं से प्यार अब। खिल उठा गुलाब है चमन में रौनकें सजी हर गली महक रहा कि चढ़ रहा खुमार अब। अजीब

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