आश्विन पूर्णिमा शरद पूर्णिमा

बाबू लाल शर्मा,बौहरा द्वारा रचित गीत प्रीत सरसे ,जो कि शरद ऋतु की मनभावनी दृश्य को प्रस्तुत कर रही है

प्रीत सरसेनेह की सौगा़त पाईलग गया मन खिलखिलाने!ऋतु सुहानी सावनी मेंपवन पुरवाई चली है‌!मेघ छायाँ कर रहे ज्यों,भीगते आँगन गली है!मोर वन मन नाचते हैफिर चले कैसे बहाने!नेह की सौगात…

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शरद पूनम-बाबू लाल शर्मा, बौहरा

    *गगनांगना छंद विधान*मापनी मुक्त सम मात्रिक छंद है यह।१६,९ मात्रा पर यति अनिवार्य चरणांत २१२दो चरण सम तुकांत,चार चरण का छंद{सुविधा हेतु चौपाई+नौ मात्रा(तुकांत२१२)}  *शरद पूनम*.     …

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