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#पंकज भूषण पाठक प्रियम

यहाँ पर हिन्दी कवि/ कवयित्री आदर०पंकज भूषण पाठक प्रियम”के हिंदी कविताओं का संकलन किया गया है . आप कविता बहार शब्दों का श्रृंगार हिंदी कविताओं का संग्रह में लेखक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा किये हैं .

नव वर्ष की कविता 2022

नव वर्ष की कविता शुभ आगमन हे नव वर्ष शुभ आगमन हे नव वर्षशुभ आगमन हे नव वर्षवंदन अर्चन हे नूतन वर्षअभिनंदन हे नवागत वर्षनतमस्तक नमन हे नव्य वर्ष। खुशियों की सौगात लाना,रोशनी की बरसात लाना,चंद्रिका की शीतलता बरसानानव सृजन मधुमास लाना। क्लेष, विषाद,कष्ट मिटानाजो बीत चुका अतीत बुराउसको न तुम पुन: दोहरानाकातर मन का क्रंदन धो जाना। नफ़रत…
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गणतंत्र दिवस पर कविता

गणतंत्र दिवस पर कविता : गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस 26 January, Republic Day गणतंत्र पर दोहा वीरों के बलिदान से,मिला हमें…
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रावण दहन करो

रावण दहन करो ravan-dahan-dashara भीतर के रावण का दमन करो,फिर तुम रावण का दहन करो।पहले राम राज्य का गठन करोफिर तुम रावण का दहन करो। चला लेना तुम बाण को बेशक़,जला देना निष्प्राण को बेशक़।बचा लेना तू विधान को बेशक़,पहले राम का अनुशरण करो।फिर तुम….. पहले राम बनकर दिखलाओ,सबको तुम इंसाफ़ दिलवाओ।पुरुषों में तुम उत्तम कहलाओ,राम की मर्यादा का वरण…
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घर का बादशाह मजदूर हो गया

घर का बादशाह मजदूर हो गया 1 मई अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 May International Labor Day पेट की आग में मजबूर हो गयाघर का बादशाह मजदूर हो गया।मना रहे अवकाश मजदूर दिवसउसे आज भी काम मंजूर हो गयादो जून की रोटी की जुगाड़ में हीमजबूर अपने घर से दूर हो गया।दिवस मनाएंगे सब एसी कमरों मेंवो तो धूप में ही मसरूर हो गया।बच्चों के दे रोटी,पानी पी सो गयाभूख…
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नज़र आता है

नज़र आता है हर अक्स यहाँ बेज़ार नज़र आता है,हर शख्स यहां लाचार नज़र आता है। जीने की आस लिए हर आदमी अब,मौत का करता इंतजार नज़र आता है। काम की तलाश में भटकता रोज यहाँहर युवा ही बेरोजगार नज़र आता है। छाप अँगूठा जब कुर्सी पर बैठा तब,पढ़ना लिखना बेकार नज़र आता है। भूखे सोता गरीब, कर्ज़ में डूबा कृषकहर बड़ा आदमी सरकार नज़र आता है। गाँव शहर की हर…
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होलिका दहन – कज प्रियम

होलिका दहन - कज प्रियम फाल्गुन पूर्णिमा होलिका दहन Falgun Purnima Holika Dahan बुराई खत्म करने का प्रण करेंआओ फिर होलिका दहन करें।औरत की इज्जत का प्रण करें,आओ फिर होलिका दहन करें। यहां तो हर रोज जलती है नारीदहेज कभी दुष्कर्म की है मारीरोज कोई रावण अपहरण करेपहले इनका मिलकर दमन करेआओ फिर..... हर घर प्रह्लाद सा कुंठित जीवनमां बाप के सपनों मरता…
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औरत कमजोर है!

औरत कमजोर है! तुम कहते हो, औरत कमजोर है!जरा देख लो ,शहर की दीवारेंवहाँ किस मर्ज पे, अधिक जोर है।रँगी दीवारों में,बस एक ही शोर हैशुक्रवार को मिलें,हकीम बैद्य सेताकत लेने जो मर्द,कमजोर हैं।तुम कहते हो….अभी से तुम घबरा गए देख करमर्दाना कमजोरियों से रँगी दीवारेंआगे देखो अभी तो बस भोर है।तुम कहते हो…औरत जीवन का सृजन करती हैमहीनों असह्य प्रसव वेदना…
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फरवरी महिना पर कविता

फरवरी महिना पर कविता लोग कहते हैं इश्क़ कमीना हैहम कहते हुस्न का नगीना है।देखो चली है मस्त हवा कैसीआ रहा मुहब्बत का महीना है। जनवरी संग गुजर गयी सर्दीप्यार का ये फरवरी महीना है।वेलेंटाइन तो पश्चिमी खिलौनायहां तो सदियों से ही मनतारहा मदनोत्सव का महीना है। सोलहो श्रृंगार कर रही सजनीआ रहा उसका जो सजना है।यमुनातट आया कृष्ण कन्हैयासंग राधा…
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आज का नेता पर कविता

आज का नेता पर कविता जहाँ बहरी सियासत है, जहाँ कानून है अंधा।करें किसपे भरोसा तब, जहाँ पे झूठ है धँधा।विचारों पे लगा पहरा,बड़ा ये ज़ख्म है गहरा,भला क्या देश का होगा,सियासी रंग है गन्दा।। मुनाफ़े का बड़ा धंधा, कभी होता नहीं मंदा।सियासी वस्त्र है ऐसा, कभी होता नहीं गंदा।सफेदी में छिपा लेता, सभी गुनाह ये अपना,सदा झोली भरी होती,सभी से मांग के…
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तिरंगे का सम्मान

तिरंगे का सम्मान देशभक्ति का गीत आओ फिर दुहराते हैंपावन पर्व राष्ट्र का रस्मों रीत निभाते हैं।स्वतंत्र देश के गणतंत्र दिवस पर फिर सेएक दिन के अवकाश का जश्न मनाते है। सूट-बूट में अफसर,नेता खादी लहराते हैंभ्रष्टाचार की कालिख़ खादी में छिपाते है।नौनिहाल बेहाल भूखे सड़क सो जाते हैं।भ्रस्टाचारी जेल में बैठ बटर नान उड़ाते हैं। सरहद पे जवान गोली से…
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