तू रोना सीख – निमाई प्रधान

तू रोना सीख – निमाई प्रधान

कविता संग्रह
कविता संग्रह

तू !
रोना सीख ।

अपनी कुंठाओं को
बहा दे…
शांति की जलधि में
अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को
तू खोना सीख ।
तू ! रोना सीख ।।

कितने तुझसे रूठे ?
तेरी बेरुख़ी से…
कितनों के दिल टूटे ?
किनके भरोसे पर खरा न उतर सका तू ?
तेरे ‘मैं’ ने किनको शर्म की धूल चटा दी?
कौन तेरी मौजूदगी में सर न उठा सका?
उन सबकी सम्वेदनाओं को
निज-अश्रुओं से भिगोना सीख ।
तू! रोना सीख ।।

तू रोना सीख
कि रोने से दिल कुलाचें भरता है ।
तू रोना सीख
कि रोने से…
दीन-दुःखियों के प्रति ममत्व झरता है ।
तू रोना सीख कि आजकल कोई रोता नहीं है
तू रोना सीख कि आजकल कोई अपना नहीं है
कुछ ऐसा कर…
कि औरों को भी ज़िंदगी मिले
तू सबके नाते ख़ुशियाँ बोना सीख ।
तू रोना सीख ।।

तू…रोना सीख…!!
-@ निमाई प्रधान’क्षितिज’

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मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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