
विश्व वर्षावन दिवस (World Rainforest Day) पर कविता
बरसात की बूंदों में गुलजार बसा , प्रकृति की सौंधी खुशबू फैला।
मेघ छाए हैं आसमान में खुले, धरती को आगामी वर्षा की चेतना ।
हरियाली छाई है, पेड़-पौधों का मेला , अभिनव सैलाब प्रकृति की अनंत सौंदर्य ।
बादल धीरे-धीरे आते हैं नजर, धरती पर खुशियों का बहारा है बिखरा ।
पर्वतों से निकली धारें नदियों में मिलीं, धरती की गोद में बरसात की मधुर लहरें बहीं।
फूलों की चमक, पुष्पों की सुगंध, कर दिया बरसात ने सबको मदहोश।
प्रकृति की यह अनमोल सौंदर्य, करता है प्रेरित संगीत में।
वर्षावन का यह दिवस, हर कवि के लिए विशेष,
गाते हैं हम सब, वर्षा के इस प्रभात पर जीवन के नेत्र से।
वर्षावन के दिनों में प्रकृति की बाहरी और भीतरी सुंदरता का वर्णन, वृक्षों की हरियाली, गांव के छोटे-छोटे बच्चों की खुशियों का संदेश, वर्षा से उत्पन्न होने वाले नए अनुभवों की चर्चा, आदि हो सकता है।
