KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

अभी दिल भरा नहीं(abhi dil bhara nahi)

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समय को  संगिनी बना कर
मेहनत से तन सजाकर
मंजिल मिल जाए सही
पर वीर कहते यही
अभी दिल भरा नहीं ।

निरंतर प्रगति पथ पर
चल अविचल सीने तन कर
अंजाम रहे बेरंग सही
पर वीर कहते यही
अभी दिल भरा नहीं ।

रण नाम कर्ण में जैसे पड़ते
तब शूर कोई इतिहास गढ़ते
हर पन्नों में उनके कारनामें रही
पर वीर कहते यही
अभी दिल भरा नहीं।

 मनीभाई ‘नवरत्न’,