KAVITA BAHAR
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अस्तित्व की हाजिरी(astitva ki haziri)

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देर एक झोंके की
दीया फिर बुझ जाएगी।
ना तू बचेगा ना हम बचेंगे
कल का दौर आज ही गुजर जाएगी।
यही संदेशा लेकर आ
ताज सा कंगूरा बना जाए ।
इस कोरे कागज धरा पर
अपनी अस्तित्व की हाजिरी लगा जाएं ।
अनोखी  करतूतें हमारी
जन जन को पाठ पढ़ाएगी
तब सच्चा साकार सपने अपने
दाह प्रज्वलित कर जाएगी.

 मनीभाई ‘नवरत्न’,छत्तीसगढ़,