KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आजादी की दूसरी लड़ाई (aazadi ki dusri ladai )

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जब तक रहेंगे देश में गद्दार ।
होती रहेगी प्रजा पर अत्याचार ।
करते रहेंगे छुपके भ्रष्टाचार ।
मां बेटी के संग बलात्कार ।
फिर कैसे होगा सपने साकार?
जब चुप रहेगी हमारी सरकार।
उठाएगा कौन इसे मिटाने की बीड़ा?
किसकी दिल पर हो रही ज्यादा पीड़ा?
सब साध रहे हैं अपना स्वार्थ ।
गिने चुने ही आते हैं करने को परमार्थ ।
हक से  मांगेगा कौन अपना अधिकार?
जब चुप रहेगी हमारी सरकार ।
खतरे में पड़ गई है देश की सुरक्षा।
आतंकित हो गया है बूढ़ा और बच्चा ।
इस दशा में करें क्या सरकार की बड़ाई?
लड़नी होगी फिर से आजादी की दूसरी लड़ाई।
अब भला जवान क्यों करेगा इंतजार ?
है जब चुप रहेगी हमारी सरकार।

 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़