KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आज अंधकार है (aaj andhkar hai)

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आज अंधकार है
सारा गांव में।
आज हाहाकार है
पानी दांव में।
फिर हुआ संघर्ष
युग पड़ाव में।
कहां छुपा है मनु
किस नाव में।
आज अंधकार है,
सारा गांव में।
पेड़ कट रहे
गर्मी में सोना दुश्वार है।
विकास नहीं ,
विनाश को न्यौता है।
कल अंधकार होगा
अखिल धरा में।
चिन्ता की बात नहीं
चिन्तन की मुद्दा है।

 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़,

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