KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

एक अजब खिलखिल है(ek azab khilkhil hai)

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जान अकेली है।
मौत सहेली है।
काँपती देह
हवा बर्फीली है ।

चादर आसरा है
दहक सहारा है।
दंत की किटकिट
सर्द की नारा है।

तन में ठिठुरन है ।
मन में जकड़न है ।
जग धुंधला सा
रज को अड़चन है ।

हर पल को मुश्किल है ।
ठंड जिनकी कातिल है।
रंग बदला मौसम का
एक अजब खिलखिल है।

मनीभाई ‘नवरत्न’,
छत्तीसगढ़, 

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