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करले योग ,ए दुनिया के लोग(karle yog ,Ye duniya ke log)

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करले योग ,करले योग ,ए दुनिया के लोग ।
करले योग ,करले योग, रहना है अगर निरोग।
यूं तो जिंदगी का ठिकाना नहीं ।
फिर हम कही , जमाना कहीं ।
जब तक जीना है, सुख से जीना है ।
सुख के लिए तू मत करना भोग।।
यहां की हर चीज पर तेरा अधिकार है ।
पर मन में तेरा अज्ञान के अंधकार है ।
योग की शक्ति से ज्ञान की ज्योति जला ।
योग का ज्ञान से बनता है ऐसा संजोग ।।
 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़