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कविता – जल संकट बनेगा। (आझाद अशरफ माद्रे)

जल एक अनमोल तोहफा है जो सृष्टि ने हमें दिया है। जल को बचाने के लिए हमें हरदम प्रयासरत होना चाहिए।

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शीर्षक – जल संकट बनेगा। कविता

गहरा रहा पानी का संकट,
अब तो चिंता करनी होगी।

ध्यान अगरचे अब ना दिया,
सबको कीमत भरनी होगी।

ये भी जंग ही है अस्तित्व की,
जो मिलकर हमें लड़नी होगी।

छोड़ उपभोगी मानसिकता को,
डोर समझदारी की धरनी होगी।

आनेवाली पीढ़ी जवाब मांगेगी,
उसकी तैयारी हमें करनी होगी।

आज़ाद भी होगा इसमें शामिल,
अब ज़िम्मेदारी तय करनी होगी।

आझाद अशरफ माद्रे
गांव – चिपळूण, महाराष्ट्र
ईमेल – [email protected]

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1 Comment
  1. कविता बहार says

    शानदार कविता, वाकई जिम्मेदारी तय करनी होगी