KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कुछ ऐसा करो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस कविता में कुशह ऐसे प्रयासों की ओर ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया गया है जिससे जीवन सार्थक हो जाए |
कुछ ऐसा करो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

कुछ ऐसा करो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
खुशियों का एहसास हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
दूसरों की मददगार हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
स्वयं से अभिभूत हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
किसी बाग की बयार हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
गुलाब की तरह महके
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
तारों सी चमक उठे
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
दूसरों को जीवन दे सके
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
दूसरों की जिन्दगी में बहार ले आये
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
परोपकार का साधन हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
सितारों की तरह चमके
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
कविताओं की सी रोचक हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
राम के आदर्शों तले जीवन पाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
कृष्ण भक्ति में डूब जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
किसी और की जिन्दगी का सामान हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
पर्वतों सी विशाल हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
बीच मझधार पतवार हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
बारिश की बूंदों की सी पावन हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
प्रकृति के आँचल तले जीवन पाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
ज्ञान के पावन जल से पवित्र हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
नानक , बुद्ध के विचारों का समंदर हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
पावनता की चरम सीमा पाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
भावनाओं , संवेदनाओं में बहना सीखे
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
इस मादरे वतन पर कुर्बान हो जाए
कुछ ऐसा करो
जिन्दगी
संस्कृति , संस्कारों के तले जीवन पाए
कुछ ऐसा करो
कुछ ऐसा करो
कुछ ऐसा करो

Leave A Reply

Your email address will not be published.