गइया की पुकार-विजिया गुप्ता “समिधा”

*गइया की पुकार*

गइया मईया करे पुकार,
बन्द करो अब अत्याचार।
स्वारथ का है ये संसार,
भटके गइया द्वार-द्वार।
दूध -दही जब मिले अपार,
तब करते हैं साज-सम्भार।
बन्द करे जब देना दूध,
तब देते हैं घर से निकार।
गौ हत्या को बन्द करो,
ऐसा शोर मचाते हैं।
लावारिस सा छोड़ उसे,
खुद मरघट तक पहुंचाते हैं।
ऐसा नियम बना सरकार,
मालिक काँपे थर-थर यार।
जिसकी गइया हो मझधार,
छीन लें उसका कारोबार।
दुर्घटनाएं थम जाएंगी,
आवागमन सुरक्षित होगा।
नहीं भूख से गाय मरेगी,
पर्यावरण भी रक्षित होगा।
जब भी कोई पाले गाय,
पूरी जिम्मेदारी निभाये।
और अगर ये ना कर पाए,
सज़ा के लिये तैयार हो जाए।
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विजिया गुप्ता “समिधा”
दुर्ग-छत्तीसगढ़
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