KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

चलते-चलते ,चलते चलो(chalate chalo)

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चलते- चलते ,चलते चलो।
रुकने का ना नाम लो।
रस्में अपनी निभाते हुए ,
कसमें को तुम जान लो ।
चलते-चलते ,चलते चलो ….

दूर नहीं ,तुम्हारी मंजिल है ।
जब साफ तुम्हारा दिल है।
मुट्ठी में रखो अपनी आरजू
काबलियत ही तेरी काबिल है।
चाहे तेज हो रोशनी नजरें टिकाए रखो ।
चलते चलते चलते चलो ….

राहों में आए मुश्किल घड़ियां
तो जोश से सर उठाना ।
हंसता है तुझे जमाना तो ,
शर्म से ना सिर झुकाना ।
अच्छे काम ना सही , जोकर बनकर हंसाते रहो ।
चलते चलते चलते चलो….

बाहर से चुस्ती रहे ,
अंदर से मस्ती रहे ।
तूफान हो सागर में तेरे,
शांत तेरी कश्ती रहें।
बरसे जितना भी घटाएं तुम पंछी उड़ते रहो।
चलते चलते चलते चलो…..

मनीभाई ‘नवरत्न’, 
छत्तीसगढ़, 

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