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चलो ऐसा राष्ट्र बनाएं – मनीभाई नवरत्न

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चलो ऐसा राष्ट्र बनाएं – मनीभाई नवरत्न

चलो ऐसा राष्ट्र बनाएं,
जिसकी पहचान,
रंग, वर्ण, जाति से ना हो।
ना हो संप्रदाय, हमारे मूल पहचान में।


बांटें नहीं खुद को
नदी पर्वत के बहाने ।
भाषा, बोली को मानें हम तराने।
चलो ऐसा राष्ट्र बनाएं।


राष्ट्र तो है दीपक
आलोकित होता संपूर्ण विश्व ।
दीये से दीये जुड़ते जाएं
अंधेरा छंट जायें
मन की आंखों से ।
तभी जानेंगे तेरी रोशनी,
मेरी रोशनी से फर्क नहीं ।


आगे बढ़ें एक लक्ष्य लेके
हम मानस पुत्र
भक्षक नहीं रक्षक हैं
अखिल ब्रम्हांड का
जो हम सबका परिवार है।


🖍️ मनीभाई नवरत्न

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