KAVITA BAHAR
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चोरी चोरी इस दिल में आई

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चोरी चोरी इस दिल में आई

चोरी चोरी इस दिल में आई ।
हमको पता ना चल सका।
आके मेरे तू दिल में समाई ।
हमको पता ना चल सका।
दिल में समा के धड़कन बढ़ाके दिल को चुराई।
हम को पता ना चल सका।

चलती है जैसे पवन, बहती है जैसे जल ।
तेरे छू लेने से ही, हुई दिल में हलचल ।।
आज मौसम कुछ कह रहे हमें ।
हम को ना पता चल सका ।।
मुरझाती है जैसे फूल, जम जाती है जैसे धूल।
तोड़ देना ना तुम ,प्यार की सारे उसूल।
आज धड़कन कुछ कह रहे हैं हमें ।
हम को ना पता चला ।।
चोरी चोरी इस दिल में आई

मनीभाई नवरत्न

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