KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जगमग दीया जलाबो

0 99

चक चंदन दिखे सुघ्घर,
लिपे -पोते घर आंगन उज्जर !
जगमग दीया जलाबो,
लक्ष्मी दाई ल मनाबो !

पावन पबरीत परब आए हे,
मिल -जुल के मनाबो !
मया पिरीत के दीया म संगी
सुनता के बाती लगाबो !
बिरबिट कारी ये अंधियारी ,
सुरहुती मभगाबो !

जाति -धरम के खोचका -डिपरा,
मेड़पार बरोबर करबो !
परे- डरे गीरे -थके के,
दुख -पीरा ल हरबो !
गरीब गुरवा के कुरिया म
चंदा- चंदईनी ऊगाबो!
🙏🙏🙏🙏

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.