KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जिंदगी का सफर- हरीश पटेल (zindagi ka safar)

जिंदगी का सफर

ज़िंदगी का सफ़र है मृत्यु तक।
तुम साथ दो तो हर शै मयख़ाना हो !
हर रोज.. है एक नया पन्ना।
हर पन्ने में, तेरा फ़साना हो !!
यहाँ हर पल बदलते किस्से हैं 
हर किस्से का अलग आधार है ।
अपने दायरे में सब सच्चे हैं 
उनका बदलता बस किरदार है ।
लगता कोई पराया अपना-सा हो 
कभी लगता दूर का अनजाना हो ।।
ज़िंदगी का सफ़र है मृत्यु तक।
तुम साथ दो तो हर शै मयख़ाना हो !
सभी फंसे हैं समय-चक्र में,
उसके ना कोई पार है ।
कुछ खट्टी, कुछ मीठी यादें हैं 
वही जीवन का सार है ।।
शोरगुलों के और महफ़िलों के दरमियां 
लगता है दिल में भरा विराना हो ।।
ज़िंदगी का सफ़र है मृत्यु तक।
तुम साथ दो तो हर शै मयख़ाना हो !
सांझ ढले जब जीवन का।
याद तुम्हारी इन आंखों पर हो।।
खुशियों का हो मेरा रैन बसेरा ।
भरोसा ख़ुद के पांखों पर हो।।
तन्हाई में गुनगुनाने को आख़िर 
जीवन का नया तराना हो ।।
ज़िंदगी का सफ़र है मृत्यु तक।
तुम साथ दो तो हर शै मयख़ाना हो !
हर रोज.. है एक नया पन्ना।
हर पन्ने में, तेरा फ़साना हो।।
                             ✍हरीश पटेल