KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जीतो हर खेल में जीतो(jito har khel me jito)

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जीतो रे जीतो रे जीतो जीतो हर खेल में जीतो।
हर दिल को जीतो ,जीत आखिर जिंदगी ही तो ।
कोई ना आगे तेरे टिक सके।
जलवा ना कभी तेरा मिट सके।
ऐसा दम लगा दो,  बाजी ना कोई तेरा छीन सके ।
हर दांव को जीतो ,हर बार में जीतो ।।
आखिर जिंदगी…
वानरों ने जैसे जीता लंका है,
फिर तुमको क्या शंका है?
एकजुट जब हो जाओगे
फिर जीत का डंका है ।
हर मन को जीतो हर पल तुम जीतो।।
 जीत आखिर… जीतो रे. . 
 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़