KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

तू आया ही क्यों लौट जाने को

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

की बातें हजार कर गया
यादें बनाने को
तू आया ही क्यों लौट जाने को

की मदमस्त भोरो सी गूंजा करती थी मैं
खामोश कर गया मेरे आशियाने को
तु आया ही क्यों लौट जाने को

साथ उम्र भर का मांगा था
कहा नहीं था यूं पल दो पल साथ निभाने को
तू आया ही क्यों लौट जाने को

की मेरी दुनिया में आ के
मेरी ही हस्ती मिटाने को
तू आया कि क्यों लौट जाने को

इंतजार तू ही किया करता था मेरी राहों में
मैंने नहीं कहा था दिल लगाने को
तू आया है क्यों लौट जाने को

तूने कहा था तुझे भी मोहब्बत थी
फिर क्यों छोड़ दिया मेरा दिल टूट जाने को
तू आया है क्यों लौट जाने को

कि जो छोड़ गया खामोशी से
तुझे फर्क ना पड़ा मेरा दिल दुखाने को
तू आया ही क्यों लौट जाने को

Leave A Reply

Your email address will not be published.