KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

देश मेरे … तू है सबसे पहले (desh mere … tu hai sabse pahle)

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यहां सब करते काम खुद के लिए ।
लड़ते रहते हैं अपने वजूद के लिए ।
पर मेरा हर करम हो देश के लिए ।
देश मेरे देश मेरे तू है सबसे पहले ।
मैं तुझ पर मर जाऊं मैं तुझ पर मिट जाऊं।
पर कभी ना अपना सर झुकाऊं ।
नेक राह को ही सदा अपनाऊं।
कुछ भी नहीं मंजूर अब तेरे बदले ।
देश मेरे देश मेरे तू है सबसे पहले ।
तू है अपनी जननी तू ही धरा और अंबर ।
रहे तुझसे नाता अटूट और सुंदर।
यश फैलाएं तेरी अब हम आगे बढ़ कर ।
चाहे हर कोई पीछे रहले ।
देश मेरे देश मेरे तू है सबसे पहले।।
-मनीभाई ‘नवरत्न’