KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

नाम हो भारत का जग में (29 august national sports day based poem )

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इस खेल खेल में 
धुलता है मन का मैल
जीने का तरीका है ये,
तू खेलभावना से खेल।
खेल महज मनोरंजन नहीं 
एक जरिया है ,सद्भावना की।
जग में मित्रता की ,
आपसी सहयोग नाता की ।।
खेल से स्वस्थ तन मन रहे ,
भावनाओं में रहे संतुलन।
जब तक मानव जीवन रहे ,
खेलने का बना रहे प्रचलन ।
जब जब देश खेलता है ,
देश की बढ़ती एकता है ।
जो भी डटकर खेलता है ,
इतिहास में नाम करता है ।
आज जरूरत बन पड़ी है,
हमको फिर से खेल की,
बच्चों को गैजेट से पहले,
बात करें हम खेल की।
देश की आबादी बढ़ रही 
पर नहीं बढ़ती हैं तमगे।
चलो मिशन बनाएं खेल में 

नाम हो भारत का जग में।
मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़