KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पर्यावरण संतुलन हेतु जैव विविधता पर आधारित श्याम कुँवर भारती की रचना

पर्यावरण संतुलन हेतु जैव विविधता पर आधारित 
हिन्दी गजल –
मौसम बदल जाएगा |
पेड़ एक लगाकर देखो मौसम बदल जाएगा |
उजड़े जंगल बसाकर देखो मौसम बदल जाएगा |
घुल गया जहर साँसो हर शहर की  फिजाओं मे |
साँसो जहर बुझाकर देखो मौसम बदल जाएगा |
हो रहे हर इंसां यहाँ अब मर्ज कैसे कैसे |
जड़ मर्ज मिटाकर देखो मौसम बदल जाएगा |
टीवी केन्सर अस्थमा चर्म  रोग कोई नया नहीं  |
हुआ क्यो पताकर देखो मौसम बदल जाएगा |
पड़ी जरूरत काट जंगल शहर बसा रहे लोग |
बिना जंगल हवा बनाकर देखो मौसम बदल जाएगा |
है जीव जन्तु जानवर जलचर थलचर नभचर जरूरी |
संतुलन सबका बिगाड़कर देखो मौसम बदल जाएगा |
साँप चूहा नेवला किट पतंग हिरण घास शेर लाज़मी |
बिन आहार जीव जिलाकर देखो मौसम बदल जाएगा |
चील गिद्ध बाज कौआ कोयल गोरैया सब चाहीए |
बिन भवरा पराग कराकर देखो मौसम बदल जाएगा |
सहारा है सबका तरुवर बन गए दुश्मन हम ही |
बिन बीज बृक्ष सृस्टी चलाकर देखो मौसम बदल जाएगा |
वास्प बादल बारिस बहारे सब एक दूसरे के सहारे |
बिन बादल बरसा कराकर देखो मौसम बदल जाएगा |

श्याम कुँवर भारती [राजभर]
कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,
मोब /वाहत्सप्प्स -995550928