KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पैसा से बढ़कर कोई नहीं(paisa se badkar koi nahi)

#poetryinhindi,#hindikavita, #hindipoem, #kavitabahar #manibhainavratna 
मुझको चाहिए था पैसा,
पर मैंने मांगा ना तुमको पैसा ।
तूने ही मुझको दी पैसा
दोस्ती का फर्ज अदा किया ऐसा ।
पैसा पैसा …
मेरी कर्ज चुकाने की हैसियत नहीं थी।
ना कोई  दौलत वसीयत नहीं थी ।
मैं तुम्हारा आभारी हूं।
मेरी पहले से ही यह जिल्लत ना थी ।
पर टूटा मेरा आशियां का रेशा रेशा ।
पैसा पैसा …
पैसा देता है दोस्तों का काम।
ऐसे दोस्तों को मेरा सलाम ।
पर तुमने तो हर पैसे के ली दाम ।
और बना दिया जीवन को हराम।
तू ही रहा था मेरा सब कुछ ।
तू ने दगा दिया कैसा ।
पैसा पैसा ….
ये यह सब खेल पैसे का है ।
ये रिश्तो का मेल पैसे का है ।
यह पैसा से बढ़कर कोई नहीं ।
यह सारा झमेल पैसे का है ।
यहां पैसों से तौलना बना है पेशा।
पैसा पैसा. . .
 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़