KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

महंगाई का दौर (manhagaai kaa dour)

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महंगाई का दौर ,
जनता के लिए उबाऊ है ।
शायद इसीलिए ,
जनता ही बिकाऊ है ।
वह दिन दूर नहीं
जब आदमियों के ठेले लगेंगे।
एक रोटी की छोड़
दाने दाने के लिए लाले पड़ेंगे ।
फैली होगी हिंसा
अत्याचार की आंधी आएगी।
भ्रष्टाचार की झुलस से
स्वर्ग की वादी जाएगी।
कलयुग का कंस
पैसे की भूख से और कौन है ?
क्या इसे ना छोड़ेगा
वाचाल अब क्यों मौन है?


 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़,